मालाकुंठी हादसे में भाई-बहन की मौत के बाद कार के एयरबैग पर उठे सवाल, टक्कर के बाद फटने की बात

रुद्रप्रयाग:- बदरीनाथ हाईवे पर मालाकुंठी के पास कार और डंपर की आमने-सामने हुई भीषण टक्कर में भाई-बहन की मौत के बाद अब वाहन की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हादसे में कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि टक्कर के दौरान कार के एयरबैग खुले, लेकिन खुलने के बाद उनके फटने की बात सामने आई है। हादसा इतना जबरदस्त था कि कार का फ्रंट हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। कार की अगली सीट पर बैठे भाई-बहन गंभीर रूप से घायल हुए और उनकी मौत हो गई। घटना के बाद एयरबैग की प्रभावशीलता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
भीषण टक्कर में एयरबैग की भूमिका पर सवाल
कार और डंपर की आमने-सामने की भिड़ंत जैसी दुर्घटनाओं में एयरबैग को यात्रियों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सिस्टम माना जाता है। एयरबैग को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि दुर्घटना के दौरान सेंसर के सक्रिय होने पर वह बेहद कम समय में खुलकर यात्रियों और वाहन के कठोर हिस्सों के बीच सुरक्षा अवरोध तैयार कर सके। एयरबैग में इस्तेमाल होने वाले कपड़े और उसकी सिलाई भी तेज गति से खुलने के दौरान उत्पन्न दबाव को ध्यान में रखकर तैयार की जाती है। लेकिन मालाकुंठी हादसे के बाद सामने आई जानकारी ने कार की सुरक्षा प्रणाली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में एयरबैग खुलने के बावजूद भाई-बहन की जान नहीं बच सकी।
क्या एयरबैग खुलते ही फटा या टक्कर से हुआ क्षतिग्रस्त?
हालांकि इस घटना के आधार पर सीधे यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा कि एयरबैग में तकनीकी खराबी थी। विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद वाहन की विस्तृत तकनीकी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एयरबैग वास्तव में खुलते ही फटा था या फिर उसके खुलने के बाद दुर्घटना के प्रभाव से वह क्षतिग्रस्त हुआ। तकनीकी तौर पर दोनों स्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं। एयरबैग का तैनात (deploy) होना, उसके बाद फटना या किसी बाहरी हिस्से से कटकर क्षतिग्रस्त होना—इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
वाहन की तकनीकी जांच से सामने आएगी वास्तविक वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक कार की जांच के दौरान एयरबैग मॉड्यूल, सेंसर, सीट बेल्ट सिस्टम, एयरबैग के कपड़े और सिलाई के साथ-साथ दुर्घटना के समय वाहन की गति और टक्कर के कोण जैसे पहलुओं को भी देखा जाना जरूरी है। इसके बाद ही यह पता चल सकेगा कि हादसे के दौरान कार की सुरक्षा प्रणाली ने निर्धारित तरीके से काम किया था या उसमें कोई तकनीकी समस्या थी। मालाकुंठी हादसे में भाई-बहन की मौत ने एक बार फिर पहाड़ी मार्गों पर सड़क सुरक्षा के साथ-साथ वाहनों में मौजूद सुरक्षा उपकरणों की वास्तविक कार्यक्षमता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



