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उत्तराखंड में शिक्षक दिवस पर 16 शिक्षकों को “शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार” से सम्मानित, शिक्षा और समाज में योगदान को मिला मान्यता

देहरादून: 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देने वाले 16 शिक्षकों को “शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन राजभवन देहरादून में हुआ, जिसमें राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने पुरस्कार प्रदान किए। यह पुरस्कार केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का प्रतीक नहीं, बल्कि पूरे शिक्षक समाज की मेहनत, समर्पण और तपस्या की पहचान भी माना जाता है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक सिर्फ ज्ञान का संचार करने वाले नहीं होते, बल्कि वे बच्चों के चरित्र-निर्माण, नैतिकता और जीवन मूल्यों की नींव रखने वाले सच्चे निर्माता हैं। उन्होंने शिक्षकों को प्रेरित करते हुए कहा कि उत्तराखंड का पर्वतीय जीवन और यहाँ की शिक्षा की परंपरा सदियों से प्रख्यात रही है और इसे मजबूत करना हम सभी की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी इस अवसर पर शिक्षकों को बधाई दी और लेखक शैलेश मटियानी की साहित्यिक योगदानों को याद करते हुए कहा कि मटियानी जी ने पहाड़ की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को अपने साहित्य में बखूबी व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और साहित्य का यह मेल बच्चों और समाज को नई दिशा देता है।

पुरस्कार विजेताओं की सूची:

प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी:

  • मुरारी लाल राणा – उत्तरकाशी
  • रंभा शाह – चमोली
  • मिली बागड़ी – रुद्रप्रयाग
  • डॉ. यतेंद्र प्रसाद गॉड – पौड़ी गढ़वाल
  • रजनी मंगाई – टिहरी गढ़वाल
  • ठाट सिंह – हरिद्वार
  • दीवान सिंह कठायत – पिथौरागढ़
  • नरेश चंद्र – चंपावत
  • डॉ. विनीता खाती – अल्मोड़ा

माध्यमिक शिक्षा श्रेणी:

  • डॉ. सुनीता भट्ट – देहरादून
  • पुष्कर सिंह नेगी – पौड़ी गढ़वाल
  • गीतांजलि जोशी – उत्तरकाशी
  • प्रकाश चंद्र उपाध्याय – चंपावत
  • दीपक चंद्र बिष्ट – अल्मोड़ा

प्रशिक्षण एवं संस्कृत शिक्षा श्रेणी:

  • प्रवक्ता राजेश कुमार पाठक – प्रशिक्षण संस्थान (डायट डीडीहाट)
  • डॉ. बलदेव प्रसाद – चमोली (संस्कृत शिक्षा)

यह पुरस्कार सम्मान-पत्र, मेडल और वित्तीय सहायता के साथ आता है। समारोह में शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति रही। इस पहल ने न केवल शिक्षकों के योगदान को मान्यता दी, बल्कि राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और शिक्षकों की प्रेरणा को भी बढ़ावा दिया।

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