उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दूसरे बैंक के मैसेज पर ग्राहक का अकाउंट फ्रीज नहीं कर सकता बैंक

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बैंकिंग व्यवस्था और खाताधारकों के अधिकारों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल किसी अन्य बैंक से प्राप्त सूचना या संदेश के आधार पर किसी ग्राहक का बैंक खाता फ्रीज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि जब तक किसी सक्षम न्यायिक प्राधिकारी, मजिस्ट्रेट या जांच एजेंसी की ओर से विधिवत आदेश जारी न हो, तब तक बैंक के पास ग्राहक के खाते के संचालन पर रोक लगाने का कानूनी अधिकार नहीं है। यह महत्वपूर्ण आदेश न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामला हरिद्वार स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की शाखा से जुड़ा था, जहां याचिकाकर्ता का बैंक खाता केवल दूसरे बैंक से मिली सूचना के आधार पर फ्रीज कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में दायर याचिका में बताया कि उसका बैंक खाता बिना किसी कानूनी आदेश के अचानक फ्रीज कर दिया गया, जिससे उसे गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। याचिका के अनुसार, यस बैंक ने कोटक महिंद्रा बैंक को सूचना दी थी कि तकनीकी त्रुटि के कारण याचिकाकर्ता के खाते में ₹44 लाख की राशि गलती से ट्रांसफर हो गई है। इसी सूचना के आधार पर कोटक महिंद्रा बैंक ने खाते के सभी लेन-देन रोक दिए। याचिकाकर्ता का तर्क था कि बैंक ने बिना किसी सक्षम न्यायालय, मजिस्ट्रेट या जांच एजेंसी के आदेश के उसका खाता फ्रीज कर दिया, जो पूरी तरह कानून के विपरीत है। उनका कहना था कि यदि किसी वित्तीय लेन-देन को लेकर विवाद था तो पहले उसकी कानूनी जांच कराई जानी चाहिए थी, लेकिन बैंक ने सीधे खाते को निष्क्रिय कर दिया, जिससे उनके नियमित वित्तीय कार्य प्रभावित हुए और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान कोटक महिंद्रा बैंक ने अदालत को बताया कि उसने केवल यस बैंक से प्राप्त सूचना के आधार पर एहतियातन खाता फ्रीज किया था। बैंक ने स्वीकार किया कि उसके पास किसी सक्षम प्राधिकारी या जांच एजेंसी का कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी प्रकार का आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं था और न ही किसी जांच एजेंसी ने खाते को फ्रीज करने का निर्देश जारी किया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल दूसरे बैंक की सूचना के आधार पर किसी ग्राहक के बैंक खाते को फ्रीज करना विधिसम्मत नहीं माना जा सकता। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने कोटक महिंद्रा बैंक, शिवालिक नगर शाखा, हरिद्वार को निर्देश दिया कि यदि खाते से संबंधित कोई अन्य कानूनी बाधा नहीं है, तो याचिकाकर्ता का बैंक खाता तत्काल प्रभाव से पुनः सक्रिय किया जाए और उसे सामान्य बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने की अनुमति दी जाए।
हाईकोर्ट के इस फैसले को बैंकिंग प्रणाली में ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल साबित हो सकता है, जहां बिना सक्षम प्राधिकारी के आदेश के बैंक ग्राहकों के खातों पर प्रतिबंध लगाने जैसी कार्रवाई करते हैं।



