चमोली का प्राचीन माता सीता मंदिर बदहाली की कगार पर, ग्रामीणों ने BKTC से पुनर्निर्माण की उठाई मांग

चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले के ज्योतिर्मठ विकासखंड स्थित चाईं गांव में माता सीता को समर्पित एक प्राचीन मंदिर आज संरक्षण के अभाव में जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह उत्तर भारत के सबसे प्राचीन और विरल माता सीता मंदिरों में से एक माना जाता है। मंदिर की हालत इतनी खराब हो गई है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए नियमित पूजा-अर्चना भी मूल गर्भगृह में नहीं कराई जा रही है।
प्रतिमा को अस्थायी स्थान पर किया गया स्थापित
ग्रामीणों के अनुसार मंदिर की दीवारों और संरचना में गंभीर क्षति आने के कारण माता सीता की प्रतिमा को सुरक्षित स्थान पर एक कमरे में स्थापित किया गया है। फिलहाल वहीं पर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संरक्षण कार्य नहीं हुआ तो यह ऐतिहासिक धरोहर गंभीर नुकसान का सामना कर सकती है।
वर्षों से लंबित है पुनर्निर्माण की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधीन है। पिछले कई वर्षों से मंदिर के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण की मांग लगातार उठाई जा रही है। ग्राम पंचायत और स्थानीय नागरिकों ने कई बार समिति को लिखित पत्र भेजे, अधिकारियों से मुलाकात की और मौखिक रूप से भी समस्या बताई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी।
धार्मिक विरासत को बचाने की मांग तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की लगातार बिगड़ती स्थिति से लोगों में चिंता बढ़ रही है और वे इसके शीघ्र संरक्षण की मांग कर रहे हैं।
चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने भी जताई चिंता
उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती ने भी मंदिर की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि समिति ने पहले कई अन्य मंदिरों के निर्माण और पुनर्निर्माण कार्य कराए हैं, लेकिन माता सीता के इस ऐतिहासिक मंदिर की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है। उन्होंने समिति से जल्द संरक्षण कार्य शुरू करने की मांग की।
तीन वर्षों से भेजे जा रहे हैं पत्र
चाईं गांव के ग्राम प्रधान शंकर लाल ने बताया कि पिछले तीन वर्षों से मंदिर की जर्जर स्थिति को लेकर लगातार समिति को पत्र भेजे जा रहे हैं। कई बार अधिकारियों को मौके की स्थिति से भी अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रतिमा को अस्थायी स्थान पर स्थापित करना पड़ा।
जरूरत पड़ी तो ग्रामीण खुद करेंगे निर्माण
ग्राम प्रधान ने कहा कि यदि समिति किसी कारणवश मंदिर का पुनर्निर्माण नहीं करा पाती है, तो ग्रामीण जनसहयोग और अपने संसाधनों से इस ऐतिहासिक मंदिर का निर्माण कराने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि यह धरोहर क्षेत्र की पहचान है और इसे किसी भी हालत में नष्ट नहीं होने दिया जाएगा।
BKTC अध्यक्ष ने दिया आश्वासन
BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि माता सीता मंदिर समिति के अधीन आने वाले 45 मंदिरों में शामिल है। उन्होंने कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए कई दानदाता भी रुचि दिखा चुके हैं और समिति से संपर्क कर चुके हैं। ग्रामीणों की मांग पर विचार किया जा रहा है और आवश्यक प्रक्रिया के बाद आगे निर्णय लिया जाएगा।
बजट को लेकर भी उठ रहे हैं सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि समिति द्वारा मंदिरों के संचालन और व्यवस्थाओं के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किया जाता है। इसके बावजूद इस ऐतिहासिक मंदिर का संरक्षण लंबे समय से लंबित है। लोगों का मानना है कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखने वाले इस मंदिर के संरक्षण को प्राथमिकता मिलनी चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस धरोहर से जुड़ सकें।




