पंजाब कांग्रेस में मतभेद बरकरार, लेकिन टकराव नहीं चाहते नाराज नेता

पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव को लेकर मतभेद सामने आने के बाद भी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी तरह के टकराव के पक्ष में नहीं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और उनके समर्थक नेताओं का कहना है कि किसी मुद्दे पर अलग राय होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। सभी नेता पार्टी हित में अपनी बात हाईकमान के सामने रखना चाहते हैं और संगठन को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ेंगे। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और ऐसे समय में संगठन के साथ किसी तरह का बड़ा प्रयोग करना उचित नहीं होगा। नेताओं की नाराजगी प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को पद पर बनाए रखते हुए तीन नए कार्यवाहक प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किए जाने के फैसले को लेकर बताई जा रही है। यह प्रस्ताव पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल की ओर से हाईकमान को भेजा गया था, जिस पर मंजूरी मिल चुकी है।
सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि पंजाब कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी नेता व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि सभी वरिष्ठ नेता सामूहिक रूप से पार्टी हाईकमान से मुलाकात करेंगे। इस दौरान पंजाब कांग्रेस से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी और हाईकमान के मार्गदर्शन के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। रंधावा ने कहा कि कांग्रेस की संगठनात्मक प्रक्रिया में केवल भूपेश बघेल ही नहीं, बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। आवश्यकता पड़ने पर सभी नेता दिल्ली जाकर भी हाईकमान से मुलाकात करेंगे और प्रदेश संगठन की स्थिति से अवगत कराएंगे। विधायक परगट सिंह ने भी कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है, जहां विचारों में मतभेद हो सकते हैं लेकिन इसका मतलब संगठन में टूट नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी नेता मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ काम करेंगे। पार्टी के भीतर सभी मुद्दों का समाधान आपसी संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।



