देहरादून में भाजपा ने मनाई डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती

देहरादून में भारतीय जनता पार्टी ने रविवार, 6 जुलाई को अपने वैचारिक मार्गदर्शक, संस्थापक नेता और प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर प्रदेशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए। ‘समर्पण पखवाड़ा’ के तहत बूथ स्तर से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक आयोजित कार्यक्रमों में कार्यकर्ताओं ने डॉ. मुखर्जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की जिस विचारधारा को आगे बढ़ाया, उसी के आधार पर आज भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के रूप में कार्य कर रही है। कार्यक्रमों में उनके जीवन, संघर्ष और राष्ट्रहित में दिए गए योगदान को विस्तार से याद किया गया तथा कार्यकर्ताओं से उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया गया।

प्रदेश भाजपा मुख्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष नरेश बंसल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि महान शिक्षाविद, न्यायविद, समाज सुधारक और दूरदर्शी राष्ट्रवादी विचारक थे। उन्होंने बताया कि मात्र 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति (वाइस चांसलर) बनने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ और उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुधार किए। नरेश बंसल ने कहा कि बंगाल को भारत का अभिन्न हिस्सा बनाए रखने में डॉ. मुखर्जी की ऐतिहासिक भूमिका रही। यदि उस समय उन्होंने दृढ़ नेतृत्व नहीं दिखाया होता तो आज देश का नक्शा अलग हो सकता था। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रहित के मुद्दों पर उन्होंने सत्ता से समझौता नहीं किया और नेहरू-लियाकत समझौते का विरोध करते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना उनके सिद्धांतों और राष्ट्रभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण था।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर भारतीय जनता पार्टी के गठन तक की यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर 1951 को डॉ. मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना कर राष्ट्रवादी राजनीति को नई दिशा दी, जो आगे चलकर भाजपा के रूप में दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक राजनीतिक पार्टी बनी। जम्मू-कश्मीर में ‘एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान’ की व्यवस्था का विरोध करते हुए उन्होंने बिना परमिट कश्मीर जाने का निर्णय लिया और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया। भाजपा नेताओं ने कहा कि धारा 370 हटाने का निर्णय डॉ. मुखर्जी के अधूरे संकल्प को पूरा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं—मुफ्त राशन, हर घर जल, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्र जैसी योजनाओं को डॉ. मुखर्जी की राष्ट्रसेवा और जनकल्याण की सोच का विस्तार बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी कार्यकर्ताओं ने उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए संगठन को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया।

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