भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंगलवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे केंद्र सरकार में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनका इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है जब राज्यसभा सदस्य के रूप में उनका छह वर्षीय कार्यकाल पूरा हो चुका है। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर राष्ट्रपति ने जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल और नए चेहरों को मौका मिलने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
जॉर्ज कुरियन मूल रूप से केरल के कोट्टायम जिले के निवासी हैं और भाजपा के उन वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं जो पार्टी की स्थापना के शुरुआती दौर से ही संगठन से जुड़े रहे हैं। अगस्त 2024 में उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुना गया था और जून 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीसरे कार्यकाल की सरकार में उन्हें केंद्रीय राज्य मंत्री बनाया गया था। मंत्री रहते हुए उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों के कल्याण, मत्स्य पालन, डेयरी और पशुपालन क्षेत्रों से जुड़े कई कार्यक्रमों की निगरानी की और विभिन्न योजनाओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई।
राजनीति के साथ-साथ जॉर्ज कुरियन का कानूनी क्षेत्र में भी लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने कानून में स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त की तथा भारत के सर्वोच्च न्यायालय में वकील के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 2017 से 2020 तक वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष भी रहे। भाजपा संगठन में उनकी पहचान एक अनुभवी रणनीतिकार और संगठनात्मक नेता के रूप में रही है। पार्टी के अंदर लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण वे राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा नेतृत्व के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे हैं।
राज्यसभा का कार्यकाल पूरा होने के बाद भाजपा ने उन्हें दोबारा उच्च सदन के लिए उम्मीदवार नहीं बनाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के समय में केरल की राजनीति और चुनावी समीकरणों को देखते हुए पार्टी ने नई रणनीति अपनाने का फैसला किया है। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है। जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे के बाद अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि केंद्र सरकार और भाजपा संगठन में उनकी अगली भूमिका क्या होगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव और लंबे राजनीतिक करियर को देखते हुए पार्टी भविष्य में उन्हें किसी नई जिम्मेदारी के साथ फिर से सक्रिय भूमिका दे सकती है।