उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने रविवार को पिथौरागढ़ जनपद के सीमांत क्षेत्र मुनस्यारी स्थित भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की 14वीं वाहिनी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों, जवानों और उनके परिवारजनों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा देश की सीमाओं की सुरक्षा में उनके योगदान की सराहना की।
कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि मुनस्यारी जैसे दुर्गम और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में देश की सीमाओं की रक्षा करना अत्यंत कठिन और जिम्मेदारी भरा कार्य है। ऐसे विषम हालात में भी आईटीबीपी के जवान जिस समर्पण, अनुशासन और उच्च मनोबल के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, वह पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
राज्यपाल ने कहा कि उन्हें मुनस्यारी आकर आईटीबीपी के वीर जवानों, अधिकारियों और उनके परिवारों से मिलने का अवसर मिला, जो उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि कठिन मौसम, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और तमाम चुनौतियों के बावजूद जवानों की मुस्तैदी और कर्तव्यनिष्ठा राष्ट्र के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाती है। देश के प्रत्येक नागरिक को अपने इन वीर जवानों पर गर्व है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को वीरभूमि के रूप में जाना जाता है और यहां की सैन्य परंपरा देश की अमूल्य धरोहर है। राज्य के हजारों सैनिक और पूर्व सैनिक देश की सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सैनिक केवल एक पेशा नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च संकल्प है, जिसके बल पर देश सुरक्षित और मजबूत बना हुआ है।
राज्यपाल ने आईटीबीपी की 14वीं वाहिनी द्वारा सीमा सुरक्षा के अलावा आपदा प्रबंधन, राहत एवं बचाव कार्यों, लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग, हिमाद्री अभियान तथा केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत किए जा रहे कार्यों की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में आईटीबीपी की भूमिका केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय नागरिकों के सहयोग, विकास और आपदा के समय राहत पहुंचाने में भी बल महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
राज्यपाल ने अधिकारियों और जवानों को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए बधाई देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा, विकास और समृद्धि हमारे सुरक्षा बलों के त्याग, समर्पण और सतत सजगता पर आधारित है। उन्होंने जवानों से इसी समर्पण और उत्साह के साथ राष्ट्रसेवा में लगे रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने जवानों और अधिकारियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं।