विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के विवादित नए नियमों को लेकर चल रहे देशव्यापी विरोध के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने यूजीसी के हालिया अधिसूचित नियमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट के इस निर्णय से उन सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षाविदों को बड़ी राहत मिली है, जो इन नियमों को भेदभावपूर्ण बता रहे थे।
क्या है विवाद की जड़?
दरअसल, यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को एक नया रेगुलेशन अधिसूचित किया था, जिसे “Promotion of Equity in Higher Educational Institutions Regulations 2026” नाम दिया गया है। इस नियम के लागू होने के बाद से ही सवर्ण समाज (जनरल कैटेगरी) में भारी आक्रोश था। आरोप है कि यह नियम सामान्य वर्ग के हितों की अनदेखी करता है और उच्च शिक्षा में असमानता को बढ़ावा दे सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में दी गई दलीलें
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में कुल 12 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट के सामने तर्क रखे कि:
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यह नियम UGC Act, 1956 की मूल भावना के खिलाफ है।
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नए प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं।
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नियमों को “मनमाना और भेदभावपूर्ण” बताते हुए कहा गया कि यह उच्च शिक्षा में योग्यता (Merit) को प्रभावित कर सकता है।
19 मार्च को होगी अगली निर्णायक सुनवाई
जस्टिस की पीठ ने याचिकाओं पर शुरुआती गौर करने के बाद केंद्र सरकार और यूजीसी के इस नए नियम पर रोक लगा दी है। अब इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 19 मार्च को होगी, जहाँ यूजीसी को इन नियमों की वैधता पर अपना पक्ष मजबूती से रखना होगा।