हिमालयी पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘पद्म भूषण’ और ‘पद्म श्री’ जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजे गए डॉ. अनिल प्रकाश जोशी अब विवादों के घेरे में हैं। उनकी संस्था हेस्को (HESCO) पर देहरादून वन प्रभाग की आर्केडिया बीट (अशारोड़ी रेंज) स्थित आरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने और वहां नियमों के विरुद्ध निर्माण कार्य करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
क्या है पूरा मामला?
आरोपों के मुताबिक, सरकार द्वारा आरक्षित वन भूमि का एक निश्चित हिस्सा कृषि कार्यों के लिए लीज पर दिया गया था। लेकिन आरोप है कि समय के साथ हेस्को ने लीज पर मिली भूमि की सीमा लांघकर आरक्षित वन क्षेत्र के बड़े हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया। इस भूमि पर न केवल संस्थागत गतिविधियां चलाई जा रही हैं, बल्कि स्थायी भवनों और पक्की सड़कों का निर्माण भी कर दिया गया है।
सैटेलाइट तस्वीरों ने दी आरोपों को मजबूती
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू ISRO-BHUVAN और Google Earth की सैटेलाइट इमेज हैं। अधिवक्ता संदीप मोहन चमोली द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में वर्ष 2011, 2013, 2024 और 2025 के तुलनात्मक चित्रों को दिखाया गया है। इन तस्वीरों में आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर हरियाली कम होती और कंक्रीट का विस्तार (HESCO परिसर) साफ़ नजर आ रहा है।
वन संरक्षण अधिनियम का उल्लंघन
यह पूरा प्रकरण Forest Conservation Act, 1980 की धारा-2 के उल्लंघन से जुड़ा है। नियम के अनुसार, आरक्षित वन भूमि का किसी भी गैर-वन प्रयोजन (Non-Forest Purpose) के लिए उपयोग करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। आरोप है कि डॉ. जोशी की संस्था ने बिना किसी अनुमति के इस बेशकीमती वन भूमि पर निर्माण गतिविधियां संचालित कीं।
