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 व्यापारियों ने अमेरिकी सामान के खिलाफ भारत छोड़ो अभियान चलाने का ऐलान किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत सहित कई देशों पर भारी टैरिफ के एलान से दिल्ली के व्यापारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कुछ संगठनों ने अमेरिकी सामान भारत छोड़ो अभियान चलाने का फैसला किया है। कारोबारियों में डर है कि कहीं व्यापार अस्त-व्यस्त न हो जाए। उनको अंदेशा है कि इससे निर्यात पर असर पड़ेगा। इसमें जिस माल को पुराने रेट में भेजा गया है, वह अभी रास्ते में है, उसकी कीमत पर बढ़ा टैरिफ घाटे का सौदा साबित होगा। वहीं, प्री-ऑर्डर को लेकर भी अनिश्चितता है। इन सबके बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) व्यापारी संगठनों से चर्चा कर अमेरिकी सामान के खिलाफ कैंपेन शुरू करेगा। उधर, कुछ संगठनों का मानना है कि दुनिया के लिए एक खिड़की खुलेगी। डायरेक्ट टैरिफ से नुकसान नहीं होने की उम्मीद है। जहां तक महंगाई की बात है, इसका असर दूसरे देशों पर होगा। इससे दुनिया के दूसरे देशों से भारत का आयात व निर्यात बढ़ सकता है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि भारत के सामान पर अमेरिकी टैरिफ की नई दरें लागू होने से भारत को हर साल सात अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। सीटीआई ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को वापस लेने की मांग की है। ऐसा न होने की सूरत में संगठन ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सामान भारत छोड़ो अभियान चलाया जाएगा। सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि निर्यात होने वाले सामान के व्यापार का नुकसान होगा। दिल्ली से भी काफी माल अमेरिका में जाता है।

अमेरिका और भारत के व्यापारी-निर्माताओं की मुश्किलें बढ़ेंगी। काफी माल पुराने रेट में डिलिवरी किया गया है, जो रास्ते में है। प्री-ऑर्डर को लेकर भी ट्रेडर्स दुविधा में हैं। व्यापार में अनिश्चितता का माहौल है। सीटीआई व्यापारी संगठनों से चर्चा करके अमेरिकी सामान के खिलाफ कैंपेन शुरू करेगा। वहीं, कारोबारियों का कहना है कि अमेरिका से बड़ी मात्रा में पेय पदार्थ, वेफर्स, फूड चेन समेत कई तरह की सर्विस भारत में उपभोग की जाती है। इन सभी अमेरिकी कंपनियों का विरोध होगा।

मेटल, पर्ल, स्टोन, लेदर, केमिकल, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिक, मसाले, मशीनरी पार्ट्स, फा द ट्वॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष राजीव बत्रा का कहना है कि यह भारत के लिए अवसर है। चीन समेत अन्य देशों पर भारत की तुलना में अधिक टैरिफ लगाया गया है। लिहाजा वहां का सामान महंगा होगा, तो भारत में निर्मित सामान उन देशों से सस्ता होगा। भारत अगर अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौता कर लेता है तो इससे व्यापार को बूस्ट मिलेगा। र्मास्युटिकल, मसाले और चावल अमेरिका को भारत निर्यात करता है। सीटीआई का कहना है कि इन पर बड़ा असर पड़ेगा।

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