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हरकी पैड़ी बैनर विवाद पर कमिश्नर का एक्शन: गंगा सभा की बायलॉज खंगालेगा प्रशासन, जल्द होगा बड़ा फैसला।

धर्मनगरी हरिद्वार के सबसे पवित्र स्थल ‘हरकी पैड़ी’ पर लगाए गए विवादित बैनरों को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इन बैनरों पर “अहिंदुओं का प्रवेश वर्जित” लिखा गया है, जिस पर अब गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

1. कमिश्नर का सतर्क रुख: “तथ्यों के बिना बयान देना जल्दबाजी”

मीडिया से मुखातिब होते हुए कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने इस मामले पर बेहद नपा-तुला रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि हरकी पैड़ी क्षेत्र में ऐसे बैनर लगाए जाने की कोई आधिकारिक सूचना अभी तक प्रशासन के पास नहीं पहुंची है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना दस्तावेजों की जांच किए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना या टिप्पणी करना प्रशासनिक गरिमा के अनुकूल नहीं होगा।

2. गंगा सभा की ‘बायलॉज’ की होगी गहन समीक्षा

इस विवाद का समाधान निकालने के लिए कमिश्नर ने एक महत्वपूर्ण कदम की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि:

  • दस्तावेजों का अध्ययन: श्री गंगा सभा के संविधान (Bylaws), ऐतिहासिक परंपराओं और धार्मिक प्रावधानों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।
  • कानूनी आधार: यह देखा जाएगा कि क्या गंगा सभा के पास इस तरह के प्रतिबंधात्मक बैनर लगाने का कोई कानूनी या प्रशासनिक अधिकार है।
  • शासन से समन्वय: इस मामले पर शासन स्तर पर चर्चा की जाएगी और उसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

3. क्या है विवाद की जड़?

पिछले कुछ दिनों से हरकी पैड़ी के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर बैनर दिखाई दे रहे हैं, जिनमें अहिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की बात कही गई है। यह मामला न केवल सामाजिक रूप से संवेदनशील है, बल्कि पर्यटन और हरिद्वार की वैश्विक छवि के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।

4. प्रशासनिक संकेत: जल्दबाजी में नहीं होगा फैसला

कमिश्नर के बयान से साफ है कि प्रशासन इस मुद्दे पर सीधे टकराव के बजाय कानूनी रास्ता तलाश रहा है। गंगा सभा की बायलॉज की समीक्षा करने की बात कहकर उन्होंने संकेत दिया है कि यदि नियमों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं मिला, तो प्रशासन सख्त रुख अपना सकता है।

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