पंजाब की राजनीति में इन दिनों एक पंथक मुद्दे को लेकर जोरदार बहस छिड़ी हुई है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के अध्यक्ष और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के एक बयान ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस मुद्दे पर जहां अकाल तख्त से जुड़े धार्मिक नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, वहीं मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी लगातार इस विषय को लेकर अकाली दल पर निशाना साध रहे हैं।
विवाद की जड़ दिसंबर 2024 में श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जारी किए गए उस हुक्मनामे से जुड़ी है, जिसमें बेअदबी मामलों को लेकर सुखबीर बादल और अकाली दल के कई नेताओं को धार्मिक जवाबदेही के तहत तलब किया गया था। उस समय अकाल तख्त के समक्ष पेश होकर अकाली नेतृत्व ने अपनी बात रखी थी और धार्मिक परंपराओं के अनुसार निर्धारित सेवा भी की थी। हाल ही में सुखबीर बादल द्वारा दिए गए एक बयान के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
सुखबीर बादल ने दावा किया कि उनके खिलाफ राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर साजिशें रची गईं। उनका कहना है कि जिन घटनाओं को लेकर उन्हें घेरा गया, उस समय वे पंजाब में मौजूद नहीं थे, लेकिन विवाद को समाप्त करने और पंथक एकता बनाए रखने के लिए उन्होंने पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। बादल ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उनकी राजनीतिक भूमिका को कमजोर करने के उद्देश्य से माहौल बनाया और उन्हें निशाना बनाया गया।
दूसरी ओर, श्री अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह ने सुखबीर बादल के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उस समय लिया गया फैसला किसी साजिश का हिस्सा नहीं था, बल्कि उपलब्ध तथ्यों, प्रस्तुत बयानों और स्वीकार किए गए पक्षों के आधार पर किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि धार्मिक मर्यादाओं और पंथक परंपराओं के अनुरूप ही निर्णय लिया गया था और यदि कोई इसे साजिश बताता है तो उसे प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए।
इस पूरे विवाद में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। उन्होंने अकाली दल पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बेअदबी से जुड़े मामलों को लेकर जनता सब कुछ जानती है और जिन लोगों ने उस समय अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी, वे अब अपने बयानों से पीछे हटने की कोशिश कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार रुख बदलना जनता के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास है।
हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और सभाओं में भी इस मुद्दे का उल्लेख किया है। वहीं अकाली दल का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है और पार्टी हमेशा पंथ, गुरुघर और सिख समुदाय की सेवा के लिए प्रतिबद्ध रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धार्मिक और राजनीतिक पहलुओं से जुड़ा यह विवाद आने वाले समय में पंजाब की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है। अकाली दल, आम आदमी पार्टी और पंथक संगठनों के बीच जारी बयानबाजी ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, जिस पर पूरे राज्य की नजर बनी हुई है।