आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों द्वारा भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के एलान के बाद पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इनमें पंजाब से जुड़े छह सांसदों के नाम शामिल होने के कारण यह मुद्दा राज्य की राजनीति का केंद्र बन गया है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने भाजपा और पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह केवल राजनीतिक दल बदल का मामला नहीं है, बल्कि पंजाब की छवि और जनता के विश्वास से जुड़ा विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लगातार पंजाब के हितों और राज्य की प्रगति को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। मान ने कहा कि पंजाब में चल रहे विकास कार्यों और जनहित की योजनाओं को रोकने के लिए राजनीतिक रणनीतियां अपनाई जा रही हैं।
सीएम मान ने कहा कि भाजपा के पास पंजाब में अपना मजबूत नेतृत्व या जनाधार नहीं है, इसलिए वह दूसरे दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़कर राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले समय में ऐसे नेताओं को जनता के बीच जवाब देना होगा। मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि पंजाब के लोग आज भी पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ नेताओं के पार्टी छोड़ने से संगठन कमजोर नहीं होगा, क्योंकि किसी भी राजनीतिक दल की असली ताकत उसके कार्यकर्ता और जनता का समर्थन होता है।
भगवंत मान ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने नेताओं को सम्मान, जिम्मेदारियां और राजनीतिक अवसर दिए, लेकिन किसी व्यक्ति के मन में क्या चल रहा है, इसका अंदाजा हमेशा नहीं लगाया जा सकता। उन्होंने कहा कि पार्टी व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर जनता के हितों के लिए काम करती रहेगी। राजनीतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब के मतदाता राजनीतिक परिस्थितियों को अच्छी तरह समझते हैं और समय आने पर अपना निर्णय भी देंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य की जनता विकास, पारदर्शिता और जनसेवा के मुद्दों पर ही अपना समर्थन तय करेगी।
सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने के फैसले के बाद पंजाब की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और दलों की चुनावी तैयारियों पर भी देखने को मिल सकता है।