पंजाब भाजपा में बढ़ा विवाद, निष्कासन के बाद अरविंद शर्मा उठाएंगे मामला सार्वजनिक

पंजाब भाजपा में एक बार फिर अंदरूनी विवाद खुलकर सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अरविंद शर्मा को पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी की ओर से उनके खिलाफ पार्टीविरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है, जबकि अरविंद शर्मा ने निष्कासन की कार्रवाई को एकतरफा और अनुचित बताया है। अरविंद शर्मा का आरोप है कि पार्टी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया। उनका कहना है कि किसी भी अनुशासनात्मक कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को आरोपों की जानकारी देकर उसका पक्ष सुना जाना चाहिए, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया। विवाद की शुरुआत एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान हुई बताई जा रही है। अरविंद शर्मा के अनुसार, वह पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल ढिल्लों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसी दौरान उनके एक सहयोगी ने मोबाइल फोन से उनकी तस्वीर खींच ली थी।
शर्मा का आरोप है कि केवल ढिल्लों के साथ तैनात एक पीएसओ ने उनके सहयोगी का मोबाइल फोन अपने हाथ में ले लिया और उसमें मौजूद तस्वीरें डिलीट करवा दीं। शर्मा का दावा है कि केवल कार्यक्रम से संबंधित तस्वीरें हटाने के बजाय मोबाइल गैलरी से अन्य तस्वीरें और सामग्री भी डिलीट करवाई गई। अरविंद शर्मा के मुताबिक, उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल ढिल्लों के सामने भी उठाया था। उन्होंने पीएसओ के व्यवहार की शिकायत करते हुए मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की थी। शर्मा का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि उनकी शिकायत पर जांच होगी, लेकिन इसके उलट कार्रवाई उनके खिलाफ ही हो गई। उनका आरोप है कि जिस मामले में उन्होंने पार्टी नेतृत्व के सामने शिकायत दर्ज करवाई थी, उसी घटनाक्रम के बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।
उन्होंने इस कार्रवाई को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक पार्टी के लिए मेहनत और निष्ठा के साथ काम किया है। शर्मा का दावा है कि वह संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों को आगे बढ़ाने में लगातार सक्रिय रहे हैं। अरविंद शर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी में उनकी सक्रियता और बढ़ती भूमिका से कुछ नेता असहज थे। उनके अनुसार, इसी कारण उनके खिलाफ कार्रवाई का माहौल तैयार किया गया और अंततः उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया। शर्मा की आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी के साथ व्यक्तिगत मित्रता भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि शर्मा का कहना है कि उनकी निजी मित्रता को राजनीतिक नजरिए से देखना उचित नहीं है और इसे पार्टी में उनकी भूमिका से जोड़ना गलत होगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि पार्टी को उनके खिलाफ पार्टीविरोधी गतिविधियों से जुड़ी कोई शिकायत थी, तो उन्हें बुलाकर आरोपों के बारे में बताया जाना चाहिए था। शर्मा के अनुसार, उन्हें अपना पक्ष रखने और पूरे मामले पर सफाई देने का अवसर नहीं दिया गया। अरविंद शर्मा के निष्कासन के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों के बीच भी कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा इस बात को लेकर तेज है कि क्या मोबाइल से तस्वीरें डिलीट कराने की शिकायत और उसके बाद पैदा हुए विवाद का निष्कासन से कोई संबंध है। वहीं यह सवाल भी बना हुआ है कि पार्टी के पास अरविंद शर्मा के खिलाफ पार्टीविरोधी गतिविधियों से जुड़े कोई अलग और ठोस कारण मौजूद थे या नहीं। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा की ओर से विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण का इंतजार किया जा रहा है। अरविंद शर्मा ने साफ किया है कि वह निष्कासन की कार्रवाई को चुपचाप स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि वह पूरे मामले को सार्वजनिक रूप से उठाएंगे और पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रखने की मांग करेंगे। पंजाब भाजपा के इस अंदरूनी विवाद ने संगठन के भीतर नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है। अब सभी की नजर पार्टी नेतृत्व की अगली प्रतिक्रिया और अरविंद शर्मा के अगले राजनीतिक कदम पर टिकी हुई है।




