क्यूबेक के बिल-21 पर फिर विवाद, सिख समुदाय समेत कई धार्मिक समूहों ने जताई नाराजगी

कनाडा के क्यूबेक प्रांत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। मॉन्ट्रियल में सरकार के अधीन कार्यरत करीब 150 कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान धार्मिक प्रतीक पहनने के कारण नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद सिख, मुस्लिम और यहूदी समुदायों सहित विभिन्न धार्मिक संगठनों ने सरकार के फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है।

जानकारी के अनुसार बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में बड़ी संख्या पंजाबी सिख समुदाय से संबंधित लोगों की बताई जा रही है। क्यूबेक सरकार के नियमों के तहत सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान पगड़ी, हिजाब, किप्पा, क्रॉस या अन्य किसी भी धार्मिक प्रतीक के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। सरकार का कहना है कि सार्वजनिक सेवाओं में धार्मिक तटस्थता बनाए रखना आवश्यक है और इसी उद्देश्य से यह कानून लागू किया गया है।

बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों को पहले नियमों का पालन करने के लिए चेतावनी दी गई थी। हालांकि कुछ कर्मचारियों ने अपने धार्मिक विश्वासों का हवाला देते हुए इन निर्देशों को मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से हटा दिया। यह कदम वर्ष 2019 में लागू किए गए विवादित बिल-21 के तहत उठाया गया है।

क्यूबेक सरकार अब इस कानून को और अधिक सख्त बनाने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित संशोधनों के तहत डे-केयर केंद्रों में काम करने वाले कर्मचारियों पर भी यह नियम लागू किया जा सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक पार्कों में सामूहिक नमाज या प्रार्थना जैसे धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाने और विश्वविद्यालय परिसरों में मौजूद प्रार्थना कक्षों को समाप्त करने जैसे प्रस्तावों पर भी चर्चा चल रही है।

इस कानून का सबसे अधिक प्रभाव सिख, मुस्लिम और यहूदी समुदायों पर पड़ रहा है, क्योंकि उनके धार्मिक प्रतीक उनकी पहचान और आस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं। मानवाधिकार संगठनों और विरोधी दलों का आरोप है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करता है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर सरकारी नौकरी से वंचित करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

वहीं क्यूबेक सरकार का तर्क है कि सार्वजनिक संस्थानों में निष्पक्षता और धर्मनिरपेक्षता बनाए रखने के लिए ऐसे नियम आवश्यक हैं। सरकार का मानना है कि सरकारी कर्मचारियों को अपने पद पर रहते हुए किसी भी धार्मिक पहचान का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए, ताकि सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके।

इस फैसले ने कनाडा में धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार और सरकारी तटस्थता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक स्तर पर संघर्ष और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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