देहरादून: उत्तराखंड में जमीन से जुड़े विवाद अब इतिहास बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को एक बड़ी सौगात देते हुए एक महीने का विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य सालों से लंबित भूमि विवादों का निस्तारण कर आम जनता को सरकारी दफ्तरों की भाग-दौड़ से मुक्ति दिलाना है।
क्यों खास है यह अभियान? अक्सर देखा जाता है कि जमीन के छोटे-छोटे विवाद कोर्ट-कचहरी और तहसीलों में सालों लटके रहते हैं, जिससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि सामाजिक सौहार्द भी बिगड़ता है। सीएम धामी ने स्पष्ट किया है कि “भूमि विवाद सीधे कानून-व्यवस्था से जुड़े हैं” और इन्हें शून्य स्तर (Zero Pendency) पर लाना सरकार की प्राथमिकता है।
अधिकारियों की जवाबदेही तय: यह अभियान केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्य सचिव हर हफ्ते इसकी समीक्षा करेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तहसील स्तर पर एसडीएम, सीओ पुलिस और चकबंदी विभाग की संयुक्त समितियां बनेंगी। इससे राजस्व और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल होगा और विवादों का पारदर्शी व न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित होगा।