उत्तराखण्ड

बिंदुखत्ता में जश्न की तैयारी: 25 फरवरी की कैबिनेट में आएगा ‘राजस्व गांव’ का ऐतिहासिक प्रस्ताव!

नैनीताल जिले के लालकुआं विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बिंदुखत्ता के निवासियों के लिए खुशियों की दस्तक सुनाई दे रही है। दशकों से बुनियादी हक और जमीन की रजिस्ट्री के लिए संघर्ष कर रहे हजारों परिवारों का सपना अब हकीकत में बदलने वाला है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के निर्देश दे दिए हैं।

बैठक का मुख्य बिंदु: 25 फरवरी की समयसीमा

सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने वन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि आगामी 25 फरवरी को होने वाली कैबिनेट बैठक में बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने का औपचारिक प्रस्ताव पेश किया जाए। इस बैठक में लालकुआं विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट और शासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस जटिल मुद्दे के समाधान की रूपरेखा तैयार की।

दशकों पुराना संघर्ष और 1966 का वो काला कानून

बिंदुखत्ता की समस्या की जड़ें साल 1966 में छिपी हैं, जब वन विभाग ने इस क्षेत्र को ‘आरक्षित वन’ (Reserved Forest) घोषित कर दिया था। इसके बाद से ही यहाँ रह रही करीब 70 से 80 हजार की आबादी, जिसमें बड़ी संख्या पूर्व सैनिकों और किसानों की है, अपनी ही जमीन पर ‘अतिक्रमणकारी’ की तरह रहने को मजबूर थी। राजस्व गांव का दर्जा न होने के कारण यहाँ:

  • जमीन की रजिस्ट्री या पट्टे नहीं हो पाते थे।

  • बैंकों से लोन मिलना नामुमकिन था।

  • कई महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा जनता तक नहीं पहुंच पाता था।

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?

इस महत्वपूर्ण चर्चा में प्रमुख सचिव वन आर. के. सुधांशु, सचिव राजस्व अमिताभ श्रीवास्तव, सचिव वन सी. रविशंकर और पीसीसीएफ (HOFF) रंजन कल्याणी जैसे दिग्गज अधिकारी शामिल थे। साथ ही, वरिष्ठ नेता कुंदन चुफाल, जगदीश पंत और पूर्व सैनिक सुंदर सिंह खनका ने जनता का पक्ष मजबूती से रखा।

राजस्व गांव बनने से क्या बदलेगा?

जैसे ही बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा मिलेगा, यहाँ के निवासियों को अपनी भूमि का स्थायी मालिकाना हक मिल जाएगा। इससे क्षेत्र में विकास कार्यों की गति तेज होगी, नई सड़कें, स्कूल और अस्पतालों का निर्माण सुगम होगा, और सबसे बड़ी बात—हजारों परिवारों को अपनी जमीन पर सिर उठाकर जीने का अधिकार मिलेगा।

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