उत्तराखण्ड

देहरादून राजपुर रोड जमीन फर्जीवाड़ा: 13 साल पहले मृत व्यक्ति के नाम से 2026 में बना पावर ऑफ अटॉर्नी, कोर्ट के आदेश पर मुकदमा

देहरादून: राजपुर रोड स्थित जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि कुछ लोग खुद को पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग का अधिकारी-कर्मचारी बताकर जमीन अधिग्रहण की जांच के नाम पर संपत्ति पर पहुंचे। इसके बाद दस्तावेजों की जांच में ऐसा मुख्तारनामा सामने आया, जो कथित तौर पर 13 साल पहले मृत हो चुके व्यक्ति के नाम से 12 मई 2026 को पंजीकृत कराया गया था। शिकायतकर्ता दया सिंह ने चार नामजद लोगों और एक अज्ञात व्यक्ति पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति पर कब्जा करने की साजिश का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश के बाद राजपुर थाना पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अधिकारी बनकर जमीन पर पहुंचे लोग

दया सिंह के अनुसार 27 मई को दोपहर करीब तीन बजे कुछ लोग राजपुर रोड स्थित उनकी संपत्ति पर पहुंचे। इनमें कुछ ने खुद को पीडब्ल्यूडी कर्मचारी बताया, जबकि अन्य ने राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी होने की बात कही। उन्होंने जमीन अधिग्रहण से संबंधित कार्रवाई का हवाला दिया। बातचीत के दौरान जब संपत्ति के कुछ हिस्सों के दूसरे लोगों के नाम दर्ज होने की जानकारी मिली तो शिकायतकर्ता ने जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कराई। इसी जांच के दौरान कथित फर्जीवाड़े का खुलासा होने का आरोप है।

2013 में हुई मौत, 2026 में पंजीकृत हुआ मुख्तारनामा

शिकायत के मुताबिक, दस्तावेजों की जांच में 12 मई 2026 को उप निबंधक चतुर्थ कार्यालय में पंजीकृत एक मुख्तारनामा मिला। इसमें शिकायतकर्ता के ससुर स्वर्गीय हरिराज सिंह को मुख्तारदाता बताया गया था। महिला का दावा है कि हरिराज सिंह की मृत्यु 11 मार्च 2013 को ही हो चुकी थी। इसके बावजूद उनके नाम से कथित तौर पर आधार कार्ड, फोटो, हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान का इस्तेमाल कर मुख्तारनामा तैयार कराया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार दस्तावेज में हरिराज सिंह की उम्र 62 वर्ष दर्ज है, जबकि उनकी मृत्यु के समय उम्र करीब 80 वर्ष थी। इस आधार पर दस्तावेज को फर्जी बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।

दीपक अग्रवाल के पक्ष में कराया गया पंजीकरण

आरोप है कि कथित फर्जी मुख्तारनामा दीपक अग्रवाल के पक्ष में पंजीकृत कराया गया। इसमें राजपुर क्षेत्र की खसरा संख्या 717, 718 और 719 की जमीन का उल्लेख होने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों के समर्थन में हरिराज सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र और मतदाता पहचान पत्र भी पुलिस को उपलब्ध कराया है।

अधिवक्ता और गवाहों की भूमिका पर भी आरोप

दया सिंह ने मामले में दीपक अग्रवाल, कपिल नागर, अमन और अधिवक्ता पुनीत दुआ को नामजद किया है। इसके अलावा एक अज्ञात व्यक्ति पर हरिराज सिंह की पहचान का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार कराने का आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, कथित मुख्तारनामे में अधिवक्ता पुनीत दुआ को दस्तावेज का रचयिता बताया गया है, जबकि कपिल नागर और अमन को गवाह के तौर पर दर्शाया गया है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

1976-77 में खरीदी गई थी जमीन

शिकायतकर्ता के अनुसार उनके ससुर हरिराज सिंह ने अपने भाई बलवंत सिंह के साथ वर्ष 1976 और 1977 में दो अलग-अलग विक्रय पत्रों के जरिए राजपुर क्षेत्र में खसरा संख्या 717, 718 और 719 की जमीन खरीदी थी। बाद में जमीन के कुछ हिस्से पर मकान बनाए गए। महिला का कहना है कि शादी के बाद वह करीब 28 वर्षों से इसी संपत्ति में रह रही हैं। उनके देवर और ननद भी लंबे समय से इसी परिसर में निवास कर रहे हैं।

थाने और एसएसपी से शिकायत के बाद कोर्ट पहुंचा मामला

महिला के मुताबिक, कथित फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने 23 जून को राजपुर थाने में शिकायत देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी। कार्रवाई नहीं होने पर 25 जून को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून को भी प्रार्थना पत्र दिया गया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां से भी अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का रुख किया। कोर्ट के आदेश के बाद राजपुर थाना पुलिस ने चार नामजद आरोपियों और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। राजपुर थाना प्रभारी पीड़ी भट्ट के अनुसार, मामले में दीपक अग्रवाल, कपिल नागर, अमन और अधिवक्ता पुनीत दुआ को नामजद किया गया है। एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।

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