पंजाब और हरियाणा के बीच दशकों पुराने सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद को सुलझाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल हुई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ में एक अहम बैठक की। बैठक के बाद दोनों मुख्यमंत्रियों के सुर बदले हुए और सौहार्दपूर्ण नजर आए, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि दोनों राज्य अब कड़वाहट के बजाय बातचीत से रास्ता निकालने के पक्ष में हैं।
बैठक की बड़ी बातें: अफसरों पर टिकी नजर
मुख्यमंत्रियों की बैठक में यह तय किया गया है कि अब दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूदा परिस्थितियों की गहन समीक्षा करेंगे।
- अधिकारियों की भूमिका: दोनों राज्यों के अफसर समय-समय पर (महीने में 3-4 बार) बैठकें करेंगे और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर अपनी सिफारिशें मुख्यमंत्रियों को सौंपेंगे।
- सार्थक चर्चा: हरियाणा के सीएम नायब सैनी ने कहा कि “अच्छे माहौल में हुई बातचीत सार्थक परिणाम लाती है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही आगामी ठोस कदम उठाए जाएंगे।
“हम भाई कन्हैया जी के वारिस”: भगवंत मान
पंजाब के सीएम भगवंत मान ने एक बड़ा भावनात्मक कार्ड खेलते हुए कहा कि हरियाणा हमारा छोटा भाई है और पंजाब की परंपरा प्यासे को पानी पिलाने की रही है। उन्होंने कहा कि यह विवाद बुजुर्गों के समय का है और अब नई पीढ़ी के नेताओं को इसे सुलझाना होगा। मान ने यह भी साफ किया कि पहले ‘पानी के बंटवारे’ का मसला हल होना चाहिए, उसके बाद ही नहर निर्माण पर विचार किया जा सकता है।
विवाद की जड़: 1981 के समझौते के तहत 214 किमी लंबी नहर का खाका खिंचा गया था।
हरियाणा का पक्ष: हरियाणा ने अपने हिस्से की 92 किमी नहर का निर्माण वर्षों पहले पूरा कर लिया है।
पंजाब की स्थिति: पंजाब में 122 किमी नहर का निर्माण होना है, लेकिन वहां काम ठप है और कई जगहों पर खुदाई को मिट्टी से भर दिया गया है।
कानूनी पेच: 2004 में तत्कालीन कैप्टन सरकार ने जल समझौते रद्द किए थे, जिसे 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था।