उत्तराखण्ड

चारधाम यात्रियों को बड़ी राहत, 33 किलोमीटर छोटा होगा सफर

चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सेना के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत निर्माणाधीन हेलंग-मारवाड़ी बाईपास का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसे वर्ष 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद बदरीनाथ धाम की यात्रा न केवल अधिक सुगम होगी, बल्कि यात्रा की दूरी में भी करीब 33 किलोमीटर तक की कमी आएगी।

करीब 6.5 किलोमीटर लंबा हेलंग-मारवाड़ी बाईपास हेलंग से शुरू होकर ज्योतिर्मठ से लगभग 13 किलोमीटर पहले मारवाड़ी पुल तक पहुंचेगा। वर्तमान में बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं को ज्योतिर्मठ और मारवाड़ी क्षेत्र में अक्सर लंबे ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। बाईपास बनने के बाद इस समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। इससे यात्रा का समय कम होगा और श्रद्धालुओं को अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक सफर मिल सकेगा।

जिलाधिकारी गौरव कुमार के अनुसार परियोजना पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है। सड़क निर्माण के साथ-साथ पहाड़ी कटान और डामरीकरण का काम तेजी से चल रहा है। अब तक लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र में हिल कटिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है, जबकि प्रथम चरण का डामरीकरण भी जारी है। निर्माण एजेंसियां तय समय सीमा के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

सीमा सड़क संगठन (BRO) के अधिकारियों के मुताबिक सड़क को डबल लेन बनाया जा रहा है ताकि भविष्य में बढ़ते यातायात का दबाव आसानी से संभाला जा सके। वर्तमान में सड़क पर पहली डामर परत बिछाई जा रही है और पूरे निर्माण कार्य के पूर्ण होने के बाद अंतिम डामरीकरण किया जाएगा। परियोजना के तहत एक बड़े और दो छोटे मोटर पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है। इसके अलावा वर्षा जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने और सड़क को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई स्थानों पर कल्वर्ट भी बनाए जा रहे हैं।

यह परियोजना केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है बल्कि सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चीन सीमा से लगे क्षेत्रों में सेना की आवाजाही के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। वर्तमान में हेलंग, ज्योतिर्मठ और मारवाड़ी के बीच का राष्ट्रीय राजमार्ग कई स्थानों पर संकरा है, जिससे भारी सैन्य वाहनों और उपकरणों की आवाजाही में कठिनाई होती है। बाईपास बनने के बाद सेना को सीमावर्ती क्षेत्रों तक तेजी और सुगमता से पहुंचने में मदद मिलेगी।

जानकारी के अनुसार इस बाईपास सड़क का प्रस्ताव सबसे पहले सेना की ओर से केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया था। सेना का मानना था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित पहुंच और रणनीतिक मजबूती के लिए वैकल्पिक मार्ग आवश्यक है। इसी आवश्यकता को देखते हुए इस परियोजना को मंजूरी दी गई थी।

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि हेलंग-मारवाड़ी बाईपास बनने से क्षेत्र के आर्थिक और पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी। यात्रा समय कम होने से श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। परियोजना पूरी होने के बाद यह मार्ग बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब, स्थानीय निवासियों और सेना सभी के लिए एक महत्वपूर्ण जीवनरेखा साबित हो सकता है।

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