निर्वाचन आयोग के खिलाफ उत्तराखंड कांग्रेस का प्रदर्शन, CEC समेत चुनाव आयुक्तों को हटाने की मांग

देहरादून: भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस ने शुक्रवार को देहरादून में प्रदर्शन किया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से सचिवालय तक मार्च निकाला और सचिवालय स्थित निर्वाचन कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाया। प्रदर्शन में प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य करन माहरा, उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा समेत कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त सहित दोनों निर्वाचन आयुक्तों को पद से हटाने, निर्वाचन आयोग के पूर्व निर्णयों की समीक्षा करने और नए निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति की मांग रखी।
मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि निर्वाचन आयोग देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थान है और चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता एवं पारदर्शिता बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है। पार्टी का आरोप है कि हाल के समय में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम जोड़ने-हटाने और आपत्तियों के निस्तारण को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई। पार्टी का दावा है कि उत्तराखंड के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों से मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की ओर से बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए जा रहे हैं, तो यह जांच का विषय होना चाहिए कि संबंधित व्यक्ति का उन मतदाताओं और क्षेत्र से वास्तविक संबंध है या नहीं।
फॉर्म-7 आवेदनों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग
प्रदेश कांग्रेस ने मांग की कि SIR प्रक्रिया के दौरान प्राप्त सभी फॉर्म-7 आवेदनों का विधानसभा और बूथवार विवरण सार्वजनिक किया जाए। साथ ही बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल करने वाले लोगों की जानकारी और उनके द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों की जांच कराए जाने की मांग की गई। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम केवल आपत्ति या फॉर्म-7 के आधार पर नहीं हटाया जाना चाहिए। पार्टी ने मांग की कि नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता का वास्तविक सत्यापन कराया जाए और उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाए।
निर्वाचन संबंधी शिकायतों के निस्तारण की मांग
ज्ञापन में कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़ी शिकायतों के समयबद्ध और निष्पक्ष निस्तारण की मांग भी की। पार्टी ने कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से उठाई जाने वाली चुनाव संबंधी आपत्तियों पर कार्रवाई की जानकारी संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराई जानी चाहिए।इसके अलावा मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया से संबंधित महत्वपूर्ण आंकड़ों, आपत्तियों और उनके निस्तारण को अधिक से अधिक सार्वजनिक करने की मांग रखी गई। कांग्रेस ने निर्वाचन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के कथित पक्षपात, दबाव या मनमानी की शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी की।
कांग्रेस ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग की
कांग्रेस ने राष्ट्रपति से निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े इन मुद्दों पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों निर्वाचन आयुक्तों को हटाने तथा उनके स्थान पर नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की मांग दोहराई।कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का मत महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची की शुद्धता तथा चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर किसी भी शिकायत का पारदर्शी तरीके से समाधान होना चाहिए। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के कई विधायक, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, प्रदेश पदाधिकारी, जिला एवं महानगर संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।




