उत्तराखंड में भाकपा (माले) के राज्य सचिव इंद्रेश मैखुरी के मोबाइल पर बिना आवेदन किए मतदाता सूची में संशोधन से जुड़े संदेश आने का मामला तूल पकड़ रहा है। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) वी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने इसे उत्तर प्रदेश के एक आवेदक द्वारा गलत मोबाइल नंबर दर्ज किए जाने से हुई तकनीकी चूक बताया था। हालांकि, मैखुरी का कहना है कि अधिकारियों को शिकायत भेजने के बाद भी उन्हें संदेश मिल रहे हैं। इससे मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के केंद्रीकृत सिस्टम को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिर आया फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट का मैसेज
इंद्रेश मैखुरी के मुताबिक, उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त, उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और चमोली के जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर मामले पर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद रविवार शाम उन्हें एक और संदेश मिला, जिसमें कथित आवेदन की फील्ड वेरिफिकेशन रिपोर्ट जमा होने की जानकारी दी गई। मैखुरी का कहना है कि उन्होंने मतदाता विवरण में सुधार के लिए कोई आवेदन नहीं किया है। ऐसे में लगातार आ रहे संदेशों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है। उनका सवाल है कि जब आवेदन उन्होंने किया ही नहीं, तो उसके सत्यापन की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ रही है?

CEO ने बताया उत्तर प्रदेश से जुड़ा मामला
विवाद सामने आने के बाद CEO वी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम ने ईमेल के जरिए मैखुरी को स्थिति स्पष्ट की। उनके अनुसार, संदेश में दर्ज रेफरेंस आईडी उत्तराखंड की नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद विधानसभा सीट से संबंधित है। CEO की सफाई के मुताबिक, वहां एक आवेदक ने मतदाता सूची में संशोधन या नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया था। आवेदन में मोबाइल नंबर दर्ज करते समय गलती हुई और मैखुरी का नंबर दर्ज हो गया। इसके चलते आवेदन स्वीकार होने तथा बूथ लेवल अधिकारी (BLO) आवंटित होने से संबंधित स्वचालित संदेश उनके फोन पर पहुंचने लगे। CEO ने यह भी आश्वस्त किया कि उत्तराखंड की मतदाता सूची में मैखुरी का नाम सुरक्षित है।
मैखुरी ने जताई थी मतदाता अधिकारों को लेकर चिंता
शुक्रवार और शनिवार को मिले शुरुआती संदेशों में मतदाता विवरण में संशोधन के आवेदन की प्राप्ति और बीएलओ प्रीति रानी के आवंटन की जानकारी थी। मैखुरी का कहना था कि उनके पैतृक गांव मैखुरा, जिला चमोली की मतदाता सूची में उनका नाम और विवरण पहले से सही हैं तथा उन्होंने फॉर्म-8 भी नहीं भरा था। उन्होंने चुनाव अधिकारियों को पत्र लिखकर अपने मतदाता विवरण में किसी भी अनधिकृत बदलाव को रोकने और मामले की जांच कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि बिना आवेदन ऐसे संदेश आने से आम मतदाताओं के बीच भी नाम कटने या विवरण बदलने की आशंका पैदा हो सकती है।
तकनीकी चूक के साथ सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
CEO की सफाई के अनुसार, मैखुरी के मामले में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने से संदेश दूसरे व्यक्ति तक पहुंचे। लेकिन मैखुरी का कहना है कि शिकायत के बाद भी संदेशों का जारी रहना स्पष्ट जवाब की जरूरत पैदा करता है। उन्होंने चुनाव आयोग की व्यवस्था के अधिक केंद्रीकृत होने पर भी सवाल उठाए हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड की मतदाता सूची में मैखुरी के रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, लगातार संदेश आने के कारण उनकी ओर से उठाए गए सवालों और आवेदन की स्थिति को स्पष्ट करना जरूरी है। इस मामले में तकनीकी चूक की वास्तविक वजह और आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण रहेगा।