हरिद्वार में होटल मालिक से 50 लाख रुपये की साइबर ठगी, फर्जी ED अधिकारी बनकर किया ‘डिजिटल अरेस्ट’ – Parvat Sankalp News

हरिद्वार में होटल मालिक से 50 लाख रुपये की साइबर ठगी, फर्जी ED अधिकारी बनकर किया ‘डिजिटल अरेस्ट’

हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार में साइबर ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर एक होटल मालिक से 50 लाख रुपये ठग लिए गए। आरोप है कि साइबर ठगों ने दिल्ली में आपराधिक मुकदमा दर्ज होने, बैंक खाते में करोड़ों रुपये के लेनदेन और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच का हवाला देकर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया। ठगों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और कोर्ट केस से जुड़ी पीडीएफ भेजकर उन्हें विश्वास दिलाया कि वह गंभीर कानूनी मुसीबत में हैं। मामले में पीड़ित की पत्नी की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

फर्जी मुकदमे और बैंक खाते का डर दिखाकर शुरू हुई ठगी

शिकायत के मुताबिक, 14 अक्टूबर को हरिद्वार निवासी सनोज के पति रवि कुमार के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने कथित तौर पर बताया कि उनके खिलाफ दिल्ली में गंभीर आपराधिक मामला दर्ज है। इसके बाद दावा किया गया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर दिल्ली के कैनरा बैंक में फर्जी खाता खोला गया है और मामले की जानकारी दरियागंज थाने से मिलेगी। इस शुरुआती कॉल के बाद ठगों ने कथित तौर पर अलग-अलग लोगों के नाम से संपर्क किया और कहानी को इस तरह पेश किया कि रवि कुमार को अपने खिलाफ बड़ी वित्तीय और आपराधिक जांच चलने का डर सताने लगा।

जेट एयरवेज और 6.80 करोड़ रुपये के लेनदेन का हवाला

शिकायत में बताया गया है कि इसके बाद विजय खन्ना नाम के व्यक्ति ने फोन किया। उसने कथित तौर पर जेट एयरवेज के पूर्व मालिक नरेश गोयल से जुड़े कैनरा बैंक घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि मामले में 247 एटीएम कार्ड इस्तेमाल किए गए हैं और उनमें से एक कार्ड रवि कुमार के आधार से जुड़ा है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके नाम पर खोले गए बैंक खाते से 6.80 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। आरोप है कि पीड़ित को डराने और मामले को वास्तविक दिखाने के लिए एक फर्जी फॉर्म भेजा गया, जिसे तत्काल भरने के लिए कहा गया।

IMO ऐप पर कॉल कर खुद को ED अधिकारी बताया

शिकायत के अनुसार, 15 अक्टूबर को आरोपियों ने रवि कुमार से IMO ऐप डाउनलोड करवाया। इसके बाद राहुल गुप्ता नाम के व्यक्ति ने ऐप पर कॉल कर खुद को प्रवर्तन निदेशालय का अधिकारी बताया। उसने कथित तौर पर कहा कि वह मामले को अदालत में पेश करने जा रहा है। आरोपियों ने अपने दावों को विश्वसनीय बनाने के लिए पांच पन्नों की एक कथित फर्जी कोर्ट केस पीडीएफ भी भेजी। इसके बाद रवि कुमार को बताया गया कि उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया गया है। उनसे कहा गया कि जांच पूरी होने तक वह कमरे से बाहर न निकलें और किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क न करें। कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी का डर दिखाकर पीड़ित को कथित तौर पर मानसिक दबाव में रखा गया। इसी दबाव के बीच ठगों ने उनसे बैंक खातों की जानकारी मांगी और रकम ट्रांसफर करने के लिए कहा।

FD तुड़वाकर 50 लाख रुपये ट्रांसफर करने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ठगों ने रवि कुमार से IDBI बैंक खाते में जमा एफडी तुड़वाने को कहा। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जांच के उद्देश्य से रकम एक सुरक्षित सरकारी खाते में जमा करानी होगी। इसी कथित झांसे में आकर होटल मालिक ने 50 लाख रुपये आरोपियों के बताए बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद जब उन्होंने खाते से जुड़ी जानकारी पर ध्यान दिया, तो पता चला कि यह किसी सरकारी एजेंसी का खाता नहीं, बल्कि एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम पर था। इसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ।

पत्नी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज, जांच में जुटी पुलिस

घटना का पता चलने के बाद पीड़ित परिवार ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब पुलिस की जांच में उन बैंक खातों, फोन नंबरों, डिजिटल दस्तावेजों और ऐप के जरिए किए गए संपर्कों की पड़ताल अहम होगी, जिनका इस्तेमाल कथित ठगी में किया गया। रकम को फ्रीज कराने और आरोपियों की पहचान करने के प्रयासों के बारे में आगे की जानकारी पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से कैसे बचें?

ध्यान रखें कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर फोन या वीडियो कॉल के जरिए किसी व्यक्ति को इस तरह हिरासत में रखने और जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर कराने की कोई वैध कानूनी प्रक्रिया नहीं है। साइबर ठग अक्सर पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी, मुकदमे और बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन का डर दिखाते हैं। ऐसी कॉल आने पर घबराकर पैसे ट्रांसफर न करें। अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या संवेदनशील दस्तावेज साझा न करें। संदिग्ध साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। शीघ्र शिकायत करने से रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।

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