उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में संभावित चुनावी गतिविधियों के बीच पदाधिकारियों और बड़े पदों के दावेदारों को लेकर चर्चाएं तेज होने का दावा किया जा रहा है। नैनीताल से ऊधम सिंह नगर जिले में आधार बदलने की कथित तैयारी और राज्य एसोसिएशन में बड़े पद पर पहुंचने के दावे ने नई बहस छेड़ दी है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में चुनावी हलचल का दावा
मामले से जुड़े दावों के अनुसार, उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन के एक पदाधिकारी नैनीताल से ऊधम सिंह नगर जिले में अपना आधार बदलने की तैयारी कर रहे हैं। इसके साथ ही एक ऐसे व्यक्ति की दावेदारी की चर्चा भी है, जिसने कथित तौर पर किसी जिला फुटबॉल एसोसिएशन में एक पूरा कार्यकाल नहीं किया है, लेकिन वह राज्य एसोसिएशन में बड़ा पद संभालने की बात कह रहा है। इन घटनाक्रमों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या संबंधित व्यक्तियों की दावेदारी निर्धारित नियमों और पात्रता की शर्तों पर खरी उतरती है।
जिला फुटबॉल एसोसिएशन के पंजीकरण और क्लबों की भूमिका पर सवाल
इस विवाद में जिला फुटबॉल एसोसिएशन (DFA) की संरचना और उसके पंजीकरण का मुद्दा भी उठाया गया है। प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, जिला एसोसिएशन का कानूनी संस्था के रूप में पंजीकृत होना जरूरी है। इसके लिए सोसाइटी या गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकरण का उल्लेख किया गया है। दावों में यह भी कहा गया है कि जिला एसोसिएशन के अंतर्गत छह क्लब होने चाहिए और उन्हें पिछले तीन वर्षों की गतिविधियों का विवरण देना होगा। इन शर्तों के आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि यदि कोई व्यक्ति अपने गृह जिले में जरूरी संगठनात्मक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाया, तो दूसरे जिले में जाने से उसकी पात्रता अपने आप कैसे सुनिश्चित हो सकती है। हालांकि, इन शर्तों की सटीक प्रयोज्यता और संबंधित चुनाव में उनकी भूमिका की पुष्टि के लिए लागू नियमों तथा आधिकारिक चुनावी दिशा-निर्देशों को देखना जरूरी है।
नैनीताल और ऊधम सिंह नगर की जिला लीग को लेकर भी सवाल
मामले में यह दावा भी किया गया है कि नैनीताल और ऊधम सिंह नगर, दोनों जिलों में जिला फुटबॉल लीग आयोजित नहीं हो सकी थी। इसी आधार पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि किसी जिले में संगठनात्मक आधार बदलने वाले व्यक्ति को संबंधित क्लब, अकादमी और लीग गतिविधियों के संबंध में कौन-से दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। फुटबॉल प्रशासन से जुड़े ऐसे मामलों में पंजीकरण, क्लबों की संबद्धता, प्रतियोगिताओं में भागीदारी और निर्धारित पात्रता की शर्तें महत्वपूर्ण हो सकती हैं। इसलिए किसी भी दावेदारी पर अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड और लागू नियमों के आधार पर ही निकाला जा सकता है।
AIFF संविधान की धारा 25.5 का हवाला
राज्य एसोसिएशन में बड़े पदों के लिए पात्रता को लेकर अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) के संविधान की धारा 25.5 का भी हवाला दिया गया है। प्रस्तुत अंश के अनुसार, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष या कोषाध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ने अथवा नामांकन पाने की पात्रता को SOM की स्थिति, AIFF की कार्यकारी समिति में कम से कम एक पूर्ण कार्यकाल तक सदस्य रहने या AIFF की संबद्ध इकाई में समकक्ष पद पर काम करने जैसी शर्तों से जोड़ा गया है। इस प्रावधान के आधार पर सवाल उठाया जा रहा है कि उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में बड़े पदों के इच्छुक उम्मीदवारों को अपनी पात्रता किस तरह साबित करनी होगी। हालांकि, धारा के पूरे संदर्भ, SOM की परिभाषा और राज्य एसोसिएशन के चुनाव पर लागू नियमों की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। केवल इस उद्धरण के आधार पर किसी व्यक्ति को अयोग्य घोषित नहीं किया जा सकता।
मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर निगाहें
दावों में यह भी कहा गया है कि उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन को चुनाव से तीन सप्ताह पहले मतदाताओं की सूची जारी करनी होगी। इसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर आपत्तियां आमंत्रित कर सकते हैं और उनका निस्तारण करने के बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी। यदि चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो मतदाता सूची, आपत्तियों के निस्तारण, उम्मीदवारों की पात्रता और चुनाव कार्यक्रम जैसे विषय अहम होंगे। इन प्रक्रियाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए एसोसिएशन की आधिकारिक अधिसूचनाओं और चुनाव संबंधी दस्तावेजों पर नजर रखना जरूरी है।
खेल विवादों के निपटारे पर भी चर्चा
खेल प्रशासन से जुड़े विवादों के समाधान के लिए केंद्र सरकार के स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। संबंधित दावे में कहा गया है कि ट्रिब्यूनल के काम शुरू करने से खेल संस्थाओं से जुड़े विवादों के निपटारे की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसकी मौजूदा स्थिति और अधिकार-क्षेत्र की पुष्टि आधिकारिक सरकारी जानकारी से की जानी चाहिए।
अब सबकी नजर चुनावी प्रक्रिया पर
उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन में संभावित चुनावी गतिविधियों के बीच संगठनात्मक पात्रता, जिला इकाइयों की स्थिति, मतदाता सूची और बड़े पदों के दावेदारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि एसोसिएशन की ओर से चुनाव कार्यक्रम, पात्रता संबंधी नियम और मतदाता सूची को लेकर क्या आधिकारिक जानकारी जारी की जाती है। फिलहाल, नैनीताल से ऊधम सिंह नगर जाने और बड़े पदों पर दावेदारी से संबंधित बातें दावों के रूप में सामने आई हैं। संबंधित व्यक्तियों और उत्तराखंड फुटबॉल एसोसिएशन का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।