उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटने और उन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की व्यवस्था पर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता लाल चंद शर्मा ने इस प्रक्रिया पर कानूनी सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), उत्तराखंड के समक्ष आपत्ति दर्ज कराई थी। हालांकि, उनका कहना है कि चुनाव आयोग की ओर से मिले जवाब में उनकी मूल आपत्ति का स्पष्ट समाधान नहीं किया गया है।
SIR में नाम कटने के बाद फॉर्म-6 पर सवाल
लाल चंद शर्मा के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची से हट गए हैं, जो पहले से वैध मतदाता रहे हैं। अब इन नामों को दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। उनकी मुख्य आपत्ति फॉर्म-6 के घोषणा पत्र के बिंदु संख्या (iii) को लेकर है। शर्मा का कहना है कि इस बिंदु के तहत आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि वह मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए पहली बार आवेदन कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो नागरिक कई वर्षों से मतदाता सूची में दर्ज रहे हैं, उनके नाम पुनरीक्षण के दौरान हट जाने पर उन्हें पहली बार आवेदन करने की घोषणा करने के लिए क्यों कहा जाए? उनके अनुसार, पहले से पंजीकृत मतदाताओं और पहली बार नाम जुड़वाने वाले आवेदकों की स्थिति अलग-अलग है, इसलिए इस अंतर को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
हटाए गए नामों की बहाली के लिए अलग व्यवस्था की मांग
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग से मांग की है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों के मामलों का सत्यापन कर उन्हें बहाल करने की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए। उनका तर्क है कि पहले से पंजीकृत मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने की अनिवार्यता से छूट देने पर विचार किया जाना चाहिए। शर्मा के मुताबिक, मौजूदा प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता नहीं होने से मतदाताओं के सामने कानूनी और प्रक्रियागत असमंजस पैदा हो सकता है। ऐसे में चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुनरीक्षण के दौरान नाम हटने और पहली बार मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के मामलों में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
चुनाव आयोग के जवाब से संतुष्ट नहीं लाल चंद शर्मा
लाल चंद शर्मा का कहना है कि उन्होंने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष विधिक आपत्ति दर्ज कराते हुए इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन आयोग की ओर से मिले जवाब में उनकी मूल आपत्ति का स्पष्ट समाधान नहीं हुआ। उन्होंने जोर दिया कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने और पहले से दर्ज नाम की बहाली के बीच अंतर स्पष्ट होना चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रक्रिया संबंधी किसी असमंजस के कारण कोई पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
जरूरत पड़ी तो न्यायालय जाएंगे कांग्रेस नेता
लाल चंद शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव आयोग इस मामले में अपनी कानूनी स्थिति और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं करता तथा आवश्यक सुधार नहीं किए जाते, तो वह इस मुद्दे को न्यायालय में चुनौती देने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, विवाद का प्रमुख सवाल यही है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से बाहर हुए पहले से पंजीकृत नागरिकों के नाम दोबारा जोड़ने के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया किस तरह लागू होगी। इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से आगे कोई स्पष्टीकरण या बदलाव आता है या नहीं, इस पर नजर रहेगी।