देहरादून: उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत एक बार फिर अपने बयानों और पार्टी नेतृत्व के साथ मुलाकात को लेकर चर्चा में हैं। उनकी ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ को लेकर संगठन के स्तर पर उठे सवालों के बाद अब कुमारी शैलजा के साथ उनकी मुलाकात ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।
हरीश रावत ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर पार्टी को मजबूत करने और आगामी विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के लक्ष्य को दोहराया। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि उत्तराखंड के लोगों से जुड़े मुद्दों पर उनकी आवाज आगे भी उठती रहेगी।
यात्रा को लेकर विवाद के बाद दिल्ली पहुंचे हरदा
हरीश रावत प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ के जरिए लोगों से संपर्क कर रहे थे। इसी बीच पार्टी के आधिकारिक कार्यक्रमों से अलग अपनी गतिविधियां चलाने को लेकर संगठन के भीतर असहमति सामने आई। प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की ओर से यात्रा को लेकर नाराजगी जताए जाने के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।
विवाद के बीच हरीश रावत ने अपने आगामी कार्यक्रम स्थगित कर दिल्ली का रुख किया। उनकी इस यात्रा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं। शुरुआत में पार्टी के कुछ प्रमुख नेताओं के साथ उनकी बैठक नहीं हो पाने की खबरों के बीच संगठन में उनकी भूमिका को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगे।
हालांकि, बाद में हरीश रावत की कुमारी शैलजा से मुलाकात हुई। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए पार्टी की मजबूती और 2027 के चुनाव को साझा लक्ष्य बताया।
शैलजा से मुलाकात के बाद क्या बोले हरीश रावत?
कुमारी शैलजा से बातचीत के बाद हरीश रावत ने कहा कि उनके बीच कई विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने जोर दिया कि कांग्रेस को मजबूत करना और आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में सत्ता परिवर्तन लाना सभी नेताओं का साझा उद्देश्य होना चाहिए।
हरदा ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य और यहां के लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों पर वह लगातार अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उनके इस संदेश को प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
रावत ने जनता से मिले सहयोग और समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में भी उन्हें लोगों का साथ मिलता रहेगा। उन्होंने राहुल गांधी के लोकतंत्र की रक्षा से जुड़े अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि इस संदेश को प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचाने की जरूरत है।
उन्होंने उम्मीद जाहिर की कि पार्टी इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए राज्य में उनकी सेवाओं का उपयोग करेगी। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस संगठन में उनकी भूमिका को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर भी सक्रियता
दिल्ली में रहते हुए हरीश रावत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग से जुड़े इंडिया गठबंधन के प्रस्तावित प्रदर्शन के समर्थन में भी अपनी बात रखी। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा संदेश में 12 अक्टूबर को होने वाले आंदोलन में शामिल होने की इच्छा जताई।
इस घटनाक्रम को ऐसे समय में देखा जा रहा है, जब कांग्रेस देशभर में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठा रही है। हालांकि, प्रदर्शन में उनकी भागीदारी को लेकर अंतिम स्थिति की पुष्टि अलग से आवश्यक है।
ईडी से जुड़े मामले के बीच दिल्ली में रुकने की चर्चा
हरीश रावत की दिल्ली यात्रा के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े दस्तावेजों का मामला भी चर्चा में रहा। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ईडी ने उनसे कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे और उन्हें 11 अक्टूबर को उत्तराखंड लौटना था।
इसी बीच रावत ने 12 अक्टूबर के प्रस्तावित जन आंदोलन में शामिल होने की बात कही। उन्होंने आंदोलन में भाग लेने के अपने फैसले को प्रतीकात्मक अंदाज में ‘एक तीर्थ और नहाने’ से जोड़कर पेश किया।
हालांकि, ईडी से संबंधित प्रक्रिया और राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच किसी सीधे संबंध का निष्कर्ष निकालने के लिए अलग से पुष्ट जानकारी जरूरी है।
2027 से पहले कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने, वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की चुनौती है। ऐसे में हरीश रावत की गतिविधियां और पार्टी नेतृत्व के साथ उनकी बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एक ओर रावत सार्वजनिक रूप से पार्टी को मजबूत करने और सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य दोहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रा को लेकर उठा विवाद संगठन के भीतर बेहतर तालमेल की जरूरत को सामने लाता है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस नेतृत्व प्रदेश में नेताओं की भूमिका और आगामी चुनाव की रणनीति को लेकर किस तरह आगे बढ़ता है। फिलहाल, कुमारी शैलजा से मुलाकात के बाद हरीश रावत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह उत्तराखंड की राजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं और 2027 के चुनाव को लेकर अपनी भूमिका निभाने के इच्छुक हैं।