12 साल बाद लौटे मसूरी शरदोत्सव में लोक संगीत की धूम, स्टार नाइट में गूंजे पहाड़ी गीत; देर रात तक झूमे दर्शक – Parvat Sankalp News

12 साल बाद लौटे मसूरी शरदोत्सव में लोक संगीत की धूम, स्टार नाइट में गूंजे पहाड़ी गीत; देर रात तक झूमे दर्शक

मसूरी: करीब 12 साल के लंबे अंतराल के बाद आयोजित हो रहा मसूरी शरदोत्सव 2026 इन दिनों लोक संस्कृति, संगीत और कला के रंग में रंगा हुआ है। शरदोत्सव की दूसरी शाम पूरी तरह उत्तराखंड के लोक कलाकारों के नाम रही। टाउन हॉल में आयोजित स्टार नाइट में प्रदेश के कई चर्चित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ऐसा माहौल बनाया कि देर रात तक दर्शक पहाड़ी गीतों की धुन पर झूमते नजर आए। कार्यक्रम में संगीता ढौंडियाल, मनोज सागर, गजेंद्र राणा, मंजू नौटियाल, मन्नू वंदना और वीरेंद्र सिंह पंवार समेत कई लोक कलाकारों ने प्रस्तुति दी। लोकप्रिय पहाड़ी गीतों के साथ कलाकारों ने उत्तराखंड की लोक संस्कृति और संगीत परंपरा की झलक भी पेश की।

12 साल बाद लोक कलाकारों को मिला बड़ा मंच

मसूरी शरदोत्सव की दोबारा शुरुआत को उत्तराखंड के लोक कलाकारों के लिए भी अहम अवसर माना जा रहा है। लंबे अंतराल के बाद इस आयोजन के लौटने से कलाकारों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। कलाकारों का कहना है कि मसूरी शरदोत्सव लंबे समय से सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण मंच रहा है। इस बार आयोजन में स्थानीय और लोक कलाकारों को प्राथमिकता दिए जाने से स्थापित कलाकारों के साथ-साथ उभरती प्रतिभाओं को भी अपनी कला दर्शकों तक पहुंचाने का मौका मिल रहा है। लोक कलाकारों के मुताबिक ऐसे मंच केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का काम भी करते हैं।

पहाड़ी संगीत अब उत्तराखंड की सीमाओं से बाहर

स्टार नाइट में पहुंचे कलाकारों ने उत्तराखंड के पहाड़ी संगीत में आए बदलावों पर भी अपनी बात रखी। उनका कहना है कि डिजिटल दौर ने पहाड़ी संगीत को नई पहुंच दी है। YouTube, सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उत्तराखंड के गीत अब देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में रहने वाले उत्तराखंडियों तक भी आसानी से पहुंच रहे हैं। कलाकारों का कहना है कि आज पहाड़ी गीतों में आधुनिक संगीत, नए वाद्ययंत्र और तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा है। म्यूजिक वीडियो की शूटिंग और पिक्चराइजेशन का तरीका भी पहले की तुलना में काफी बदल गया है। इसका असर यह हुआ है कि युवा पीढ़ी भी पहाड़ी संगीत और लोकधुनों से तेजी से जुड़ रही है। हालांकि कलाकारों का मानना है कि आधुनिक प्रयोगों के बावजूद पहाड़ी संगीत की मूल पहचान उसकी लोकधुन, स्थानीय भाषा और पहाड़ की जीवनशैली से ही बनी हुई है।

लोक संगीत को बड़े मंचों पर मिल रही पहचान

कलाकारों ने कहा कि उत्तराखंड की संगीत परंपरा बेहद समृद्ध है और अब इसे प्रदेश से बाहर भी व्यापक पहचान मिल रही है। पहाड़ी गीतों के कई वीडियो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि यदि उत्तराखंड के अलग-अलग शहरों और पर्यटन स्थलों पर स्थानीय कलाकारों को इसी तरह मंच मिलता रहे तो इससे प्रदेश की लोक संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही, ऐसे आयोजनों से नए कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने और संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर भी मिलता है।

मीरा सकलानी ने बताया शरदोत्सव का उद्देश्य

नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कार्यक्रम में पहुंचे सभी कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि शरदोत्सव को दोबारा शुरू करने का उद्देश्य मसूरी की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करना और स्थानीय कलाकारों को बड़ा मंच उपलब्ध कराना है। उनके मुताबिक शरदोत्सव में उत्तराखंड की लोक संस्कृति को विशेष स्थान दिया जा रहा है। इसके साथ ही देश के दूसरे हिस्सों से सांस्कृतिक टीमों को भी मसूरी आमंत्रित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को देश की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से देखने का अवसर मिले।

गीत-संगीत के साथ खेलों पर भी फोकस

शरदोत्सव को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा गया है। नगर पालिका की ओर से युवाओं और बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए मसूरी के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं और गतिविधियां भी आयोजित की जा रही हैं। इन प्रतियोगिताओं में बच्चों से लेकर बड़े खिलाड़ी तक हिस्सा ले रहे हैं। इस तरह शरदोत्सव के माध्यम से कला, संस्कृति और खेल—तीनों क्षेत्रों में स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देने का प्रयास किया जा रहा है।

टाउन हॉल में देर रात तक गूंजे पहाड़ी गीत

स्टार नाइट के दौरान टाउन हॉल दर्शकों से खचाखच भरा रहा। जैसे ही कलाकारों ने अपने लोकप्रिय गीत शुरू किए, दर्शक भी संगीत की धुन पर झूमते और नाचते नजर आए। स्थानीय लोगों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटकों ने भी पहाड़ी संगीत का आनंद लिया। करीब 12 साल बाद लौटे शरदोत्सव की दूसरी शाम ने मसूरी में सांस्कृतिक उत्सव की एक अलग तस्वीर पेश की। एक ओर उत्तराखंड की पुरानी लोक परंपराओं की विरासत नजर आई तो दूसरी ओर आधुनिक तकनीक और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा नया पहाड़ी संगीत भी दिखाई दिया।

कलाकारों ने जताया उत्साह और आभार

लोक गायक गजेंद्र राणा ने शरदोत्सव के आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में पहाड़ी कलाकारों की मौजूदगी इस कार्यक्रम को खास बना रही है। उन्होंने आयोजन से जुड़े लोगों के प्रयासों के लिए आभार जताया। वहीं मनोज सागर ने मसूरी की जनता और आयोजनकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ मंच साझा करना उनके लिए गर्व की बात है। लोक गायिका संगीता ढौंडियाल ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम एक पीढ़ी को दूसरी पीढ़ी से जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने नए कलाकारों को मेहनत और निरंतर प्रयास जारी रखने का संदेश दिया। मंजू नौटियाल ने भी कार्यक्रम को लेकर अपना उत्साह जाहिर किया और दर्शकों से मिले प्यार व समर्थन के लिए आभार जताया। लोक गायक वीरेंद्र पंवार ने नगर पालिका अध्यक्ष और सभासदों को शरदोत्सव दोबारा आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ प्रस्तुति देना उनके लिए गौरव का अनुभव है।

लोक संस्कृति और आधुनिकता का संगम बना शरदोत्सव

मसूरी शरदोत्सव 2026 की दूसरी शाम ने यह दिखाया कि उत्तराखंड का लोक संगीत अपनी पारंपरिक जड़ों से जुड़े रहते हुए डिजिटल दौर के साथ भी आगे बढ़ रहा है। लंबे अंतराल के बाद लौटे इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों को मंच मिलने से जहां सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिल रही है, वहीं नई पीढ़ी के कलाकारों के लिए भी नए अवसर बन रहे हैं। मसूरी की वादियों में गूंजते पहाड़ी गीतों ने शरदोत्सव की शाम को यादगार बना दिया और स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों को भी उत्तराखंड की लोक संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिला।

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