उत्तराखंड में प्री-एसआईआर और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव हुआ है। ऐसे में जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट गए हैं, उनके सामने दोबारा नाम दर्ज कराने की चुनौती है। लेकिन इस प्रक्रिया में जल्दबाजी करना भारी पड़ सकता है। खासतौर पर यदि कोई व्यक्ति पहले से मतदाता के तौर पर पंजीकृत रहा है और दोबारा आवेदन करते समय अपनी पुरानी जानकारी छिपाकर गलत घोषणा करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का जोखिम हो सकता है।
SIR के बाद लाखों नाम मतदाता सूची से हटे
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में प्री-SIR और SIR प्रक्रिया के बाद करीब 13.95 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। वहीं लगभग 1.29 लाख नए मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल किया गया है। SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 अक्टूबर तक प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 71,58,949 बताई गई है। इस बड़े बदलाव के बाद कई ऐसे मतदाता भी सामने आ सकते हैं, जिनका नाम किसी कारणवश मौजूदा सूची में नहीं है। ऐसे लोगों को दोबारा पंजीकरण कराने से पहले अपनी पिछली मतदाता जानकारी की जांच कर लेनी चाहिए।


Form-6 भरने से पहले क्यों जरूरी है सावधानी?
नाम कटने के बाद कई लोग बिना पूरी जानकारी लिए सीधे Form-6 भरने की कोशिश करते हैं। लेकिन यदि कोई व्यक्ति पहले किसी मतदाता सूची में दर्ज था, तो आवेदन में अपनी पुरानी स्थिति से संबंधित जानकारी को सही तरीके से देना जरूरी है। गलत तथ्य या झूठी घोषणा देकर आवेदन करने की स्थिति में कानूनी परेशानी पैदा हो सकती है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 झूठी घोषणा या गलत जानकारी से संबंधित दंड का प्रावधान करती है। इसलिए मतदाताओं को किसी भी फॉर्म में जानकारी भरते समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
नाम दोबारा जुड़वाने के लिए क्या करें?
अगर आपका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था और अब नहीं है, तो सबसे पहले यह पता करें कि नाम किस कारण से हटाया गया है। बिना पुरानी स्थिति बताए नए मतदाता के तौर पर आवेदन करने से बचना चाहिए।
1. पुरानी जानकारी न छिपाएं
अगर आपके पास पुराना EPIC यानी वोटर आईडी नंबर है, तो उसे सुरक्षित रखें और दोबारा आवेदन करते समय उससे संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं।
2. BLO से संपर्क करें
अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO से संपर्क करके नाम हटने की वजह और उसे दोबारा दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी लें।
3. आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें
मतदाता अपनी स्थिति और आवेदन से जुड़ी जानकारी चुनाव आयोग के आधिकारिक पोर्टल या Voter Helpline App के माध्यम से भी जांच सकते हैं।
4. ERO से सलाह लें
यदि नाम हटने, पुराने रिकॉर्ड या आवेदन प्रक्रिया को लेकर कोई भ्रम है, तो संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी यानी ERO से जानकारी लेना बेहतर है। इससे गलत जानकारी के आधार पर आवेदन करने की संभावना कम होगी।
एक छोटी गलती बन सकती है बड़ी परेशानी
मतदाता सूची में नाम दोबारा जुड़वाने की कोशिश करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि आवेदन में वही जानकारी दी जाए जो वास्तविक और सत्य हो। पुराने मतदाता रिकॉर्ड को छिपाकर नया मतदाता बनने का दावा करना या गलत घोषणा करना कानूनी जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए यदि आपका नाम SIR के बाद मतदाता सूची से हट गया है, तो घबराकर जल्दबाजी में Form-6 भरने के बजाय पहले अपने पुराने रिकॉर्ड की जांच करें, BLO या ERO से संपर्क करें और नियमों के अनुसार ही आवेदन करें।