उत्तराखंड में भारी बारिश का अलर्ट, आपदा प्रबंधन ने बढ़ाई निगरानी; चारधाम-कांवड़ यात्रियों पर भी नजर

देहरादून:- उत्तराखंड में मानसून के बीच लगातार हो रही बारिश ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग की ओर से कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किए जाने के बाद आपदा प्रबंधन विभाग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। संवेदनशील इलाकों में 24 घंटे निगरानी रखने और पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन संभावित स्थानों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बारिश का सिलसिला जारी है। ऐसे में कम समय में होने वाली तेज बारिश को लेकर पर्वतीय जिलों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भारी बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़कें बंद होने, जलभराव और नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।
चार जिलों में ऑरेंज, सात में येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने फिलहाल उत्तराखंड के कई जिलों के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और चंपावत में ऑरेंज अलर्ट है। वहीं उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी, चमोली, पिथौरागढ़ और ऊधम सिंह नगर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। अधिकारियों को इन जिलों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू करने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
भूस्खलन संभावित क्षेत्रों पर विशेष निगरानी
पर्वतीय जनपदों में उन स्थानों पर खास निगरानी रखी जा रही है, जिन्हें पहले से भूस्खलन के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। मौसम अलर्ट के बाद जिला प्रशासन को अतिरिक्त एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सड़क मार्गों पर जेसीबी और अन्य जरूरी मशीनरी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही आपात स्थिति में राहत एवं बचाव टीमों को तत्काल मौके पर भेजने की तैयारी रखी जा रही है।
चारधाम और कांवड़ यात्रा को लेकर भी सतर्कता
भारी बारिश के अलर्ट के बीच चारधाम यात्रा और कांवड़ यात्रा को लेकर भी प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। प्रदेश में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए जिलों को आपात स्थिति में यात्रियों के ठहरने, भोजन और पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोकने और मौसम के सामान्य होने के बाद ही आगे भेजने की व्यवस्था पर भी प्रशासन का फोकस है।
मांग के आधार पर जिलों को जारी किया जा रहा बजट
आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जिलों में जरूरी संसाधनों और बजट की उपलब्धता को लेकर भी लगातार काम किया जा रहा है। विभिन्न जिलों से आपदा प्रबंधन के लिए मिली मांग के आधार पर बजट जारी किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर राहत एवं बचाव की तैयारियों में किसी तरह की कमी न रहे।
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन के मुताबिक, मौसम विभाग ने कई जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से देहरादून और हिमाचल प्रदेश से सटे क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए अधिकारियों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, अन्य जिलों को भी हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बादल फटने का फिलहाल कोई पूर्वानुमान नहीं
विनोद कुमार सुमन ने कहा कि कम समय में अत्यधिक बारिश होने पर उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में नुकसान की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि, फिलहाल मौसम विभाग की ओर से बादल फटने जैसी किसी विशेष घटना का पूर्वानुमान नहीं दिया गया है। इसके बावजूद आपदा प्रबंधन विभाग किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियां पूरी रख रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की निगरानी केवल बारिश तक सीमित नहीं रहेगी। भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, सड़क मार्गों, नदी-नालों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखी जाएगी। साथ ही चारधाम और कांवड़ यात्रियों की सुरक्षा, राहत-बचाव और आवश्यक सुविधाओं को लेकर भी अतिरिक्त चौकसी बरती जाएगी।




