हरेला पर्व पर दून पुलिस की हरियाली मुहिम, पुलिस लाइन सहित पूरे जिले में चला वृक्षारोपण अभियान

लोक पर्व हरेला के अवसर पर दून पुलिस ने पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से जिलेभर में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया। इस अभियान के तहत पुलिस लाइन देहरादून से लेकर सभी थाना और चौकी परिसरों तक बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल पौधारोपण करना नहीं, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देना भी रहा।
SSP देहरादून ने किया पौधारोपण
अभियान की शुरुआत पुलिस लाइन देहरादून में हुई, जहां वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून ने जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर पौधे लगाए। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और अधिक से अधिक पौधे लगाकर ही आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण दिया जा सकता है।

पुलिस लाइन में लगाए गए करीब 100 पौधे
कार्यक्रम के दौरान पुलिस लाइन परिसर में लगभग 100 फलदार और छायादार पौधों का रोपण किया गया। पौधों का चयन इस प्रकार किया गया कि भविष्य में वे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परिसर की हरियाली और जैव विविधता को भी बढ़ावा दें।
थानों और चौकियों में भी चला अभियान
हरेला पर्व के अवसर पर जिले के सभी थाना और चौकी परिसरों में भी बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया। इसके साथ ही पहले से लगे पौधों की देखभाल, क्यारियों की सफाई और परिसर के सौंदर्यीकरण का कार्य भी किया गया, ताकि हरित वातावरण को और बेहतर बनाया जा सके।

वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून, पुलिस अधीक्षक अपराध/नगर, अपर पुलिस अधीक्षक दूरसंचार, क्षेत्राधिकारी सदर, क्षेत्राधिकारी डालनवाला सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

हरियाली के साथ जनजागरूकता का संदेश
दून पुलिस का यह अभियान केवल औपचारिक वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका उद्देश्य समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी था। पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की, ताकि उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।




