पंजाब

सीएम भगवंत मान की कथित वायरल वीडियो पर पंजाब की राजनीति गरमाई

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की कथित विवादित वीडियो को लेकर राज्य की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है। बुधवार को भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस ने अलग-अलग प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्यमंत्री और पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को धार्मिक भावनाओं से जुड़ा बताते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

भारतीय जनता पार्टी ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखा है। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रति पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव को भी भेजी है।

तरुण चुघ ने कहा कि पंजाब के इतिहास में शायद ही कभी ऐसा दौर आया हो, जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री पर गुरुओं के अपमान और धार्मिक संस्थाओं की मर्यादा को चुनौती देने जैसे आरोप लगे हों। उन्होंने दावा किया कि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियां सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली हैं। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि पूरे मामले को दबाने के लिए सरकारी मशीनरी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट का सहारा लिया गया। उनका कहना है कि यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल सत्ता का दुरुपयोग नहीं बल्कि धार्मिक संस्थाओं की सर्वोच्चता को चुनौती देने का मामला भी है।

वहीं शिरोमणि अकाली दल ने भी इस विवाद पर कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता परमबंस सिंह रोमाणा ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि केवल फॉरेंसिक लैब से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। रोमाणा ने मांग की कि कथित फर्जी रिपोर्ट तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए।

अकाली दल का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। पार्टी ने मांग की है कि यह भी जांच की जाए कि रिपोर्ट किसके निर्देश पर तैयार की गई और इसके पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं। साथ ही अकाली दल ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से भी इस मामले पर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है।

इधर कांग्रेस ने भी मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब सरकार पर तीखा हमला बोला है। पंजाब कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, विधायक सुखपाल सिंह खैहरा, परगट सिंह और एआईसीसी के संयुक्त कोषाध्यक्ष विजय इंदर सिंगला शामिल हुए।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सिख पंथ और गुरु साहिबान राजनीति से ऊपर हैं और किसी भी परिस्थिति में उनकी मर्यादा से समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि कथित फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने वाले पुलिस अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मुख्यमंत्री को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तो माफी मांगनी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस पूरे मामले में सच्चाई को छिपाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन अब विभिन्न घटनाक्रमों के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

फिलहाल इस विवाद ने पंजाब की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर विपक्ष मुख्यमंत्री पर कार्रवाई की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार और आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा पंजाब की राजनीति और धार्मिक विमर्श दोनों में अहम विषय बना रह सकता है।

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