रेस्क्यू के दौरान 3 पुलिसकर्मी भी धुएं की चपेट में आए

देहरादून के रिस्पना पुल के पास स्थित Panacea Hospital में हुए भीषण अग्निकांड ने एक बार फिर अस्पतालों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में अब तक तीन पुलिसकर्मियों समेत कुल 10 लोग घायल हो गए हैं, जबकि दम घुटने से एक बुजुर्ग महिला मरीज की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और अस्पताल परिसर में धुएं व आग के कारण हालात बेहद भयावह हो गए। घटना बुधवार की बताई जा रही है, जब अस्पताल के आईसीयू में अचानक आग लगने से धुआं तेजी से फैल गया। पुलिस के अनुसार कंट्रोल रूम से सूचना मिलते ही राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचा। पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आईसीयू में भर्ती मरीजों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया। इस दौरान कई मरीज और सुरक्षाकर्मी धुएं की चपेट में आ गए।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान घने धुएं और गैस के कारण स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। कई मरीजों के साथ-साथ बचाव कार्य में लगे पुलिसकर्मियों को भी ऑक्सीजन की कमी का सामना करना पड़ा। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी Kailash Hospital में शिफ्ट किया गया, जहां उनका उपचार जारी है। पुलिसकर्मियों की हालत पर भी डॉक्टरों की विशेष निगरानी रखी जा रही है। बताया जा रहा है कि हादसे के समय आईसीयू में पहले से वेंटिलेटर पर रखी गई एक बुजुर्ग महिला मरीज की हालत गंभीर थी। आग और धुएं के बीच उनकी हालत और बिगड़ गई और उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। प्राथमिक जांच में आग लगने का कारण एसी में ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

घटना की जानकारी मिलते ही देहरादून एसएसपी Pramendra Dobal मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर घायल पुलिसकर्मियों से मुलाकात की और डॉक्टरों से उनके इलाज की जानकारी ली। प्रशासन ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच के आदेश दे दिए हैं। फायर ब्रिगेड और पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई से कई मरीजों की जान बचाई जा सकी, लेकिन इस हादसे ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि फायर सेफ्टी सिस्टम और इमरजेंसी प्रोटोकॉल का पालन सही तरीके से किया गया था या नहीं।

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