हाईकोर्ट में गूंजा संदीप पाठक और संजीव अरोड़ा का मामला, पंजाब सरकार और ईडी पर उठे बड़े सवाल
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में शुक्रवार को आम आदमी पार्टी के बागी राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा से जुड़े मामलों पर अहम सुनवाई हुई। अदालत ने जहां संदीप पाठक मामले में पंजाब सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई, वहीं संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी को लेकर ईडी की कार्रवाई पर भी कई गंभीर सवाल उठाए गए। दोनों मामलों ने राजनीतिक और कानूनी हलकों में नई बहस छेड़ दी है।
संदीप पाठक ने FIR की जानकारी के लिए खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
राज्यसभा सांसद संदीप पाठक ने अपने खिलाफ कथित रूप से दर्ज एफआईआर की जानकारी पाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अदालत ने पिछली सुनवाई में पंजाब सरकार को स्पष्ट जवाब देने के निर्देश दिए थे कि पाठक के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज है या नहीं। लेकिन शुक्रवार को सुनवाई के दौरान भी पंजाब सरकार कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी। इस पर चीफ जस्टिस ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि एफआईआर दर्ज है तो बता दीजिए, और अगर नहीं है तो वह भी स्पष्ट कर दीजिए। अदालत ने पूछा कि राज्य सरकार आखिर इस मामले में संकोच क्यों कर रही है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल दी राहत
सुनवाई के दौरान संदीप पाठक के वरिष्ठ अधिवक्ता रणदीप राय ने पंजाब सरकार पर अदालत से “लुका-छिपी” खेलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार यह बताने से बच रही है कि मामला दर्ज हुआ है या नहीं। राय ने सुप्रीम कोर्ट के यूथ बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया मामले का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी एफआईआर को 24 घंटे के भीतर सार्वजनिक करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सांसद नहीं बल्कि हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का सवाल है। वहीं पंजाब सरकार के वकील ने दलील दी कि याचिका मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित आशंका है और याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत जैसे वैधानिक उपाय अपनाने चाहिए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई तक संदीप पाठक के खिलाफ बिना अदालत की अनुमति कोई कठोर कार्रवाई न करने के आदेश दिए हैं।
संजीव अरोड़ा ने ईडी की गिरफ्तारी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
दूसरी ओर पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने अपनी गिरफ्तारी और रिमांड को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को केवल औपचारिकता बनाकर संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया। अरोड़ा के वकीलों ने अदालत में कहा कि उन्हें वास्तविक रूप से सुबह 7:15 बजे हिरासत में ले लिया गया था, लेकिन आधिकारिक गिरफ्तारी शाम 4 बजे दिखाई गई। बचाव पक्ष ने इसे “स्वतंत्रता पर प्रहार” बताते हुए कहा कि घंटों तक नियंत्रण में रखने के बाद गिरफ्तारी दिखाना कानून की मूल भावना के खिलाफ है।
ईडी की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल
अदालत में यह भी दलील दी गई कि 5 मई को ईसीआईआर दर्ज होने और 9 मई की छापेमारी के बीच ईडी ने न तो धारा 50 के तहत समन जारी किया और न ही कोई स्वतंत्र पूछताछ की। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि पुराने FEMA मामले की सामग्री को पीएमएलए गिरफ्तारी का आधार बनाया गया, जो कानून का दुरुपयोग है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया कि जो अधिकारी पहले शिकायतकर्ता की भूमिका में था, वही “रीजन टू बिलीव” कैसे तैयार कर सकता है।
फिलहाल संजीव अरोड़ा को नहीं मिली राहत
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद फिलहाल संजीव अरोड़ा को कोई राहत नहीं दी। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी है। गौरतलब है कि अरोड़ा के खिलाफ गुरुग्राम में मामला दर्ज हुआ था।