चम्पावत में नाबालिग से जुड़े कथित सामूहिक दुष्कर्म साजिश मामले की जांच अब पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। मामले में पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्तियों में लगातार बदलाव और तथ्यों के संशोधन ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक विवादास्पद बना दिया है। शुरुआत में पुलिस अधीक्षक रेेखा यादव ने बताया था कि जिस कमरे में कथित साजिश रची गई, वहां ताला नहीं लगा था। लेकिन बाद में जारी दूसरी विज्ञप्ति में कहा गया कि कमरे का ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया और फिर बाहर से दोबारा ताला लगाया गया। कुछ ही समय बाद इस तथ्य को भी हटा दिया गया। शुक्रवार को पुलिस ने तीन अलग-अलग प्रेस विज्ञप्तियां जारी कीं, जिनमें कई बार तथ्य बदले गए और कुछ बिंदुओं को पूरी तरह हटाया गया। इससे जांच की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक विज्ञप्ति में कहा गया था
कि मामले की विवेचना उपनिरीक्षक राजेश जोशी को सौंपी गई है और आरोपियों कमल सिंह रावत व अर्जिता राय को घटनास्थल पर ले जाकर घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया गया। लेकिन बाद में “पुनर्निर्माण” वाला हिस्सा हटा दिया गया। इसके बाद एक और संशोधन में यह दावा जोड़ा गया कि आरोपी ने एक 16 वर्षीय नाबालिग को कमरे में बंधक बनाकर रस्सी से बांधा और सोशल मीडिया पर झूठा वीडियो वायरल कर फंसाने की साजिश रची गई। हालांकि यह हिस्सा भी बाद में हटा दिया गया।
लगातार बदलते बयानों और संशोधित विज्ञप्तियों के चलते पुलिस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग इस पूरे मामले को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर बहस कर रहे हैं। पुलिस की ओर से एक ही दिन में तीन अलग-अलग समय पर विज्ञप्तियां जारी की गईं—दोपहर 3:43 बजे, शाम 5:30 बजे और 6:38 बजे—जिनमें बार-बार तथ्य बदले गए।