77वें गणतंत्र दिवस के गौरवशाली अवसर पर उत्तराखंड सचिवालय में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन ने तिरंगा फहराया। इस अवसर पर उन्होंने सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रशासन में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और तकनीक के समावेश पर विशेष जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुशासन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि परिणामों से मापा जाता है।
संविधान: अधिकारों से बढ़कर कर्तव्यों का बोध
मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में डॉ. भीमराव अंबेडकर और संविधान निर्माताओं को नमन करते हुए कहा कि हमारा संविधान केवल कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है।
- मूल मंत्र: संविधान हमें न्याय और समानता के साथ-साथ कर्तव्यों का बोध कराता है।
- जनता ही शक्ति का स्रोत: 26 जनवरी 1950 को यह तय हुआ था कि देश की सत्ता का अंतिम स्रोत जनता ही होगी, इसलिए हर अधिकारी को स्वयं को जनता का सेवक मानना चाहिए।
सचिवालय: राज्य की नीति की ‘धड़कन’
राज्य निर्माण के 25 वर्ष (रजत जयंती) पूर्ण होने के बाद वर्ष 2026 को उन्होंने एक नवोन्मेषी चरण बताया। उन्होंने सचिवालय की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा:
- नीति निर्माण का केंद्र: सचिवालय ही वह स्थान है जहाँ से योजनाएँ जन्म लेती हैं और शासन का संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचता है।
- परिणाम आधारित युग: आज का नागरिक केवल योजनाओं के बारे में नहीं पूछता, बल्कि यह देखता है कि उसके जीवन में वास्तविक परिवर्तन क्या आया।
प्रशासन में तकनीक और ‘विकसित भारत @2047’
मुख्य सचिव ने भविष्य की चुनौतियों और अवसरों पर बात करते हुए कहा कि विकसित भारत @2047 का संकल्प हर कर्मचारी का साझा संकल्प है।
- तकनीक का समावेश: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स अब शासन के अनिवार्य अंग हैं।
- ई-गवर्नेंस: उत्तराखंड ने डिजिटल सेवाओं और पारदर्शी भर्ती में लंबी छलांग लगाई है, लेकिन सुशासन एक निरंतर प्रक्रिया है।