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संसद के ‘संविधान सदन’ से PM मोदी का बड़ा संदेश: कॉमनवेल्थ देशों के स्पीकर्स को किया संबोधित।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को संसद भवन के ऐतिहासिक सेंट्रल हॉल (अब संविधान सदन) में 28वें कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (CSPOC) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न केवल भारत की लोकतांत्रिक जड़ों की बात की, बल्कि आधुनिक संसदीय चुनौतियों पर भी वैश्विक नेताओं का ध्यान खींचा।

सेंट्रल हॉल का ऐतिहासिक महत्व: संबोधन के दौरान पीएम मोदी भावुक दिखे। उन्होंने कहा कि जिस हॉल में आज विदेशी डेलीगेट्स बैठे हैं, वहीं भारत की संविधान सभा की बैठकें होती थीं। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस प्रतिष्ठित स्थान का नाम ‘कॉन्स्टिट्यूशन हाउस’ रखा गया है, जो हमारी लोकतांत्रिक विरासत का प्रतीक है।

सम्मेलन के मुख्य एजेंडे: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला की अध्यक्षता में आयोजित इस 3 दिवसीय कार्यक्रम (14-16 जनवरी) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सोशल मीडिया के प्रभाव और नागरिकों की भागीदारी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी।

  • AI और इनोवेशन: इस सत्र का नेतृत्व मलेशिया कर रहा है।
  • सोशल मीडिया: सांसदों पर इसके प्रभाव पर श्रीलंका अपना पक्ष रखेगा।
  • पेपरलेस पहल: भारत ने इस सम्मेलन को पूरी तरह डिजिटल और कागज रहित बनाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है।

वैश्विक भागीदारी: इस सम्मेलन में 42 देशों के 61 स्पीकर्स हिस्सा ले रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान इस वैश्विक चर्चा का हिस्सा नहीं है, जबकि बांग्लादेश में चुनाव प्रक्रिया के कारण वहां से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा है। यह सम्मेलन लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और आधुनिक विधायी तरीकों को साझा करने का एक बड़ा मंच साबित हो रहा है।

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