उत्तराखंड का पिरान कलियर न केवल आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि इसे रहस्यों और अदृश्य शक्तियों का भी अड्डा माना जाता है। हरिद्वार जिले में रुड़की से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित हज़रत साबिर पाक की दरगाह सदियों से लाखों लोगों की आस्था का केंद्र रही है। कहा जाता है कि यहां आने वाला कोई भी श्रद्धालु खाली हाथ नहीं लौटता।
आस्था से जुड़ी दरगाह
हज़रत साबिर साहब की दरगाह पर हर दिन हजारों श्रद्धालु चादर और फूल चढ़ाकर अपनी मन्नतें पूरी होने की दुआ करते हैं। दूर-दराज़ से लोग यहां सिर्फ इबादत के लिए नहीं बल्कि अपनी परेशानियों और मुसीबतों से छुटकारा पाने की उम्मीद में भी आते हैं। यही वजह है कि यह दरगाह धार्मिक के साथ-साथ आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद खास मानी जाती है।
दरगाह का रहस्य – जब बदल जाता है माहौल
दरगाह में सबसे अनोखा दृश्य उस समय देखने को मिलता है, जब यहां ‘हाज़िरी’ लगाई जाती है। इस दौरान कई लोग अचानक अजीब व्यवहार करने लगते हैं। खासकर महिलाएं जोर-जोर से चिल्लाने, झूमने और अनजान आवाज़ें निकालने लगती हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह सब अदृश्य शक्तियों या जिन्न-भूत-प्रेत के असर की वजह से होता है।
क्यों कहते हैं पिरान कलियर को ‘भूतों का डेरा’?
श्रद्धालु मानते हैं कि दरगाह की दुआ और आध्यात्मिक ताकत से यह अदृश्य साया धीरे-धीरे निकल जाता है। कुछ मामलों में यह असर शांति से समाप्त होता है, जबकि कुछ में व्यक्ति को यातना देकर दरगाह से विदा होता है। यही वजह है कि पिरान कलियर को लोग अक्सर ‘भूतों का डेरा’ भी कहते हैं।
पीढ़ियों से जारी परंपरा
सदियों से परिवार इस दरगाह में आते रहे हैं। आज भी मानसिक या आत्मिक कष्ट झेल रहे लोग यहां राहत और सुकून की तलाश में पहुंचते हैं। किसी के लिए यह दरगाह आस्था का केंद्र है तो किसी के लिए रहस्यों से भरी एक अनोखी जगह। पिरान कलियर दरगाह इस बात का उदाहरण है कि कैसे भारत की धरती पर आस्था और रहस्य एक साथ मिलकर अनूठा अनुभव कराते हैं। यही कारण है कि यह दरगाह हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।