देहरादून। आज दिनांक 29 अगस्त को दून उद्योग व्यापार मंडल की कोर कमेटी की एक अति-आवश्यक बैठक आयोजित हुई। बैठक में संगठन के सभी प्रमुख पदाधिकारी और कोर कमेटी के सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान पूर्व में हुई जिला कार्यसमिति की बैठक की समीक्षा की गई और वहां पारित हुए प्रस्तावों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक में यह तय किया गया कि व्यापारी हितों से जुड़े जिन मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए गए थे, उन्हें किस प्रकार तेज़ी से आगे बढ़ाया जाए, इस पर रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही, अब तक उन समस्याओं पर किए गए कार्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
व्यापारी हितों में हमेशा अग्रणी रहा है संगठन – अध्यक्ष विपिन नागलिया
बैठक को संबोधित करते हुए दून उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष आदरणीय विपिन नागलिया जी ने कहा कि –“दून उद्योग व्यापार मंडल सदैव से व्यापारी हितों के लिए कार्य करता आया है। प्रशासन, शासन और सरकार के समक्ष हम हमेशा मजबूती के साथ व्यापारियों की आवाज उठाते रहे हैं। भविष्य में भी व्यापारी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा।” उन्होंने यह भी बताया कि संगठन की स्थापना 1972 में हुई थी और तब से लेकर अब तक यानी पिछले 53 वर्षों से यह मंडल देहरादून के व्यापारियों के हितों की रक्षा करता आ रहा है। वर्तमान में मंडल से जुड़ी लगभग 209 व्यापारी इकाइयां मजबूती से संगठन के साथ खड़ी हैं।
“मैं सिर्फ दून उद्योग व्यापार मंडल से जुड़ा हूं” – संरक्षक अनिल गोयल
कोर कमेटी की बैठक में संगठन के संरक्षक श्री अनिल गोयल ने भी स्पष्ट किया कि वे लगभग 40 वर्षों से दून उद्योग व्यापार मंडल के साथ जुड़े हुए हैं और इसके “सच्चे सिपाही” रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनका किसी अन्य व्यापारी संगठन से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि कुछ लोग बिना उनकी अनुमति के उनके नाम और फोटो का उपयोग अपने बैनरों या निमंत्रण पत्रों में कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी – “मैं देहरादून में किसी और व्यापारी संगठन से जुड़ा नहीं हूं। कोई भी संगठन मेरे नाम और फोटो का उपयोग बिना सहमति न करे। दून उद्योग व्यापार मंडल ही मेरा परिवार है और मैं इसका सिपाही था, हूं और रहूंगा।”
संगठन की पहचान – निस्वार्थ व्यापारी सेवा
बैठक में यह भी दोहराया गया कि दून उद्योग व्यापार मंडल देहरादून का एकमात्र ऐसा संगठन है जो बिना किसी निजी स्वार्थ के सिर्फ व्यापारी हितों की आवाज बुलंद करता है। चाहे पुलिस-प्रशासन के समक्ष बात रखनी हो या शासन-प्रशासन से समाधान निकालना हो, संगठन हमेशा अग्रणी भूमिका निभाता रहा है।