फिन्ना सिंह डैम टेंडर तुरंत निरस्त हो: बिक्रम का आरोप, अनुभवहीन कंपनी को मिला ठेका – Parvat Sankalp News

फिन्ना सिंह डैम टेंडर तुरंत निरस्त हो: बिक्रम का आरोप, अनुभवहीन कंपनी को मिला ठेका

पूर्व मंत्री एवं भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने कहा है कि चीफ इंजीनियर विमल नेगी की दुखद मृत्यु से भी सरकार ने कोई सबक नहीं सीखा। पेखूबेला प्रोजेक्ट को लेकर मैंने सबसे पहले कुछ गंभीर सवाल उठाए थे, परंतु दुर्भाग्यवश सरकार ने उन चेतावनियों को नजरअंदाज़ किया। आज फिर वही लापरवाही और भ्रष्टाचार कांगड़ा जिला की फिन्ना सिंह परियोजना में दिखाई दे रहा है, लेकिन इस बार मामले को कानूनी रूप से तार्किक अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। कांगड़ा जिला में जल शक्ति विभाग द्वारा शुरू की गई फिन्ना सिंह परियोजना के अंतर्गत लगभग 300 करोड़ रुपए की लागत से एक बांध का निर्माण किया जाना है।
इस परियोजना का टेंडर इसी जून माह एक ऐसी कंपनी को दे दिया गया है, जिसे बांध निर्माण का कोई अनुभव नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग ने जानबूझकर इस टेंडर से ज्वाइंट वेंचर की शर्त हटा दी, जिससे प्रतियोगिता पूरी तरह खत्म हो गई और केवल एक मनपसंद कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि यह फैसला संविधान में उल्लेखित समान अवसर और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की जो मूल भावना है उसका खुला उल्लंघन है। यह टेंडर जनरल फाइनेंशियल रूल्स का उल्लंघन है, जो जनधन के उपयोग में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करते हैं। इसमें कंपटीशन एक्ट की भी सीधी अवहेलना की गई है क्यूंकि विभाग ने इस टेंडर में प्रतिस्पर्धा को ही ख़तम कर दिया। सूचना यह भी है कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर इस टेंडर को लेकर दबाव बनाए गए हैं, जो इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना देती हैं।
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि मैं कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि क्या यही है वह संविधान बचाओ आंदोलन जिसकी बात आप देश भर में कर रहे हैं? हिमाचल प्रदेश में जहां आपकी ही पार्टी की सरकार है, वहां सरकारी संस्थाओं के माध्यम से संविधान को ही सबसे अधिक रौंदा जा रहा है – जो इस टेंडर प्रक्रिया में हुआ है। भ्रष्टाचार किसी भी प्रदेश को दीमक की तरह खोखला करता है। हमें ऐसा हिमाचल चाहिए जहां योजनाएं विकास के लिए बनें, न कि चहेतों की जेबें भरने के लिए। सरकारें आती जाती हैं, लेकिन जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। हम इस टेंडर को पूर्णत: अवैध और जनविरोधी मानते हैं। इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए और यदि राज्य सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाती है, तो हम जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार, सेंट्रल विजिलेंस कमीशन और अन्य संस्थाओं के समक्ष ये बात उठाएंगे और दोषियों को बक्शा नहीं जाएगा । मैं सरकार को चेतावनी देता हूं कि अगर इस बार भी तथ्यों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो मैं इस पूरे मामले को कानूनी रूप से एक निष्कर्ष तक ले जाऊंगा। हम यह भी मांग करते हैं कि इस परियोजना के बढ़े-चढ़े हुए एस्टीमेट की निष्पक्ष जांच हो, क्योंकि यह परियोजना केंद्र व राज्य सरकार की 90:10 भागीदारी में बन रही है। बांध कोई छोटा मोटा प्रोजेक्ट नहीं होता। इसमें तकनीकी अनुभव और विशेषज्ञता जरूरी होती है। बिना अनुभव वाली कंपनी को यह काम देना सीधे-सीधे लाखों लोगों की जान, जल संपदा और जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ है।

 

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