उत्तराखण्ड

हिंदी पत्रकारिता दिवस 2022 आज, कलम से पहुंचकर डिजिटल तक का मिशन

हिंदी भाषी पत्रकारों के लिए 30 मई बेहद खास दिन है। इस तिथि को देश में हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। पत्रकारिता को समाज का आईना भी कहा जाता है, साथ ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी माना जाता है। वहीं पिछले एक दशक में पत्रकारिता का रूप बदल गया है।

भारत में ही नहीं बल्कि पूर विश्व में पत्रकारिता डिजिटल के रूप में समाहित हो गई है। वहीं पत्रकारिता डिजिटल होने के कारण संसार के किसी कोने में घटित घटना हमें चंद मिनटों में मिल जाती है।

डिजिटल पत्रकारिता में सभी न्यूज, फीजर एवं  रिपोर्ट संपादकीय सामग्री आदि को इंटरनेट के जरिए वितरित किया जाता है।

 

 

भारत में हिन्दी पत्रकारिता की शुरुआत बंगाल से हुई और इसका श्रेय राजा राममोहन राय को दिया जाता है। राजा राममोहन राय ने ही सबसे पहले प्रेस को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ा। भारतीयों के सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक, आर्थिक हितों का समर्थन किया। समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों पर प्रहार किये और अपने पत्रों के जरिए जनता में जागरूकता पैदा की।

राममोहन राय ने कई पत्र शुरू किये। जिसमें अहम हैं-साल 1816 में प्रकाशित ‘बंगाल गजट’। बंगाल गजट भारतीय भाषा का पहला समाचार पत्र है। इस समाचार पत्र के संपादक गंगाधर भट्टाचार्य थे। इसके अलावा राजा राममोहन राय ने मिरातुल, संवाद कौमुदी, बंगाल हैराल्ड पत्र भी निकाले और लोगों में चेतना फैलाई। 30 मई 1826 को कलकत्ता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल के संपादन में निकलने वाले ‘उदंत्त मार्तण्ड’ को हिंदी का पहला समाचार पत्र माना जाता है।

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