जब नियति अपना क्रूर खेल खेलती है, तो धन और वैभव भी छोटे पड़ जाते हैं। वेदांता समूह के संस्थापक अनिल अग्रवाल के इकलौते पुत्र और अरबों की संपत्ति के वारिस अग्निवेश अग्रवाल का एक स्कीइंग हादसे में आकस्मिक निधन हो गया है। इस दुखद समाचार ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है।
एक पिता का दर्द और ‘महादान’ का संकल्प
सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा करते हुए अनिल अग्रवाल ने लिखा कि यह उनकी जिंदगी का सबसे अंधकारमय दिन है। लेकिन, एक सच्चे नायक की तरह उन्होंने इस व्यक्तिगत शोक के बीच भी मानवता को प्राथमिकता दी। उन्होंने घोषणा की कि वह अपने बेटे से किए वादे के अनुसार अपनी निजी कमाई का 75% हिस्सा दान करेंगे।
“दुख जब परोपकार का मार्ग बन जाए, तो वह अमर हो जाता है।” — अनिल अग्रवाल का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए मानवता की सेवा की सबसे बड़ी मिसाल है।
अग्निवेश अग्रवाल: एक परिचय (जीवन का सफर)
- जन्म और शिक्षा: 3 जून 1976 को पटना में जन्मे अग्निवेश ने अजमेर के प्रसिद्ध मेयो कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की।
- पारिवारिक गठबंधन: साल 2001 में उनका विवाह श्री सीमेंट के एमडी हरि मोहन बांगर की सुपुत्री पूजा बांगर से हुआ, जिसने देश के दो बड़े औद्योगिक घरानों को जोड़ा।
- व्यावसायिक दूरदर्शिता: अग्निवेश केवल वारिस नहीं थे, बल्कि एक प्रखर निवेशक और डायरेक्टर भी थे। उन्होंने हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश को प्राथमिकता दी और तेंगपानी टी व स्टरलाइट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी कंपनियों को अपनी सेवाएं दीं।
पीएम मोदी ने व्यक्त की संवेदना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस क्षति को ‘झकझोर देने वाला’ बताया। उन्होंने अनिल अग्रवाल को ढांढस बंधाते हुए लिखा कि इस कठिन समय में पूरा देश उनके साथ है। बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति होने के बावजूद, अनिल अग्रवाल का झुकाव हमेशा अपनी जड़ों की ओर रहा है, और आज उनका पूरा प्रदेश इस गम में शरीक है।