उत्तराखंड की आराध्य देवी मां नंदा की विदाई की सबसे पवित्र और दुनिया की सबसे कठिन पैदल यात्राओं में शुमार ‘नंदा देवी राजजात’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। नंदा देवी राजजात समिति ने औपचारिक घोषणा करते हुए बताया है कि सितंबर 2026 में प्रस्तावित इस यात्रा को अब वर्ष 2027 के लिए स्थगित कर दिया गया है।
क्यों लिया गया यात्रा स्थगित करने का निर्णय? समिति के अनुसार, यह निर्णय कई महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखकर लिया गया है:
- प्राकृतिक आपदा का भय: सितंबर के महीने में उच्च हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और हिमस्खलन (Avalanche) का खतरा बना रहता है। अतीत की घटनाओं से सबक लेते हुए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है।
- काल गणना और परंपरा: धार्मिक कैलेंडर की गणना और पारंपरिक चक्र के अनुसार 2027 को इस महापर्व के लिए अधिक उपयुक्त पाया गया है।
- प्रशासनिक तैयारियां: यात्रा के विशाल पैमाने को देखते हुए समिति चाहती है कि भक्तों को एक सुव्यवस्थित और आध्यात्मिक अनुभव मिले, जिसके लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है।
वसंत पंचमी पर तय होगी अंतिम तिथि यात्रा की आधिकारिक और सटीक तिथियों की घोषणा आने वाली वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर की जाएगी। इस दिन पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद पंचांग गणना के आधार पर यात्रा का पूरा शेड्यूल जारी किया जाएगा। बता दें कि पिछली राजजात वर्ष 2014 में आयोजित हुई थी और यह यात्रा सामान्यतः प्रत्येक 12 वर्ष के अंतराल पर होती है।
कुंभ की तर्ज पर प्राधिकरण और 5000 करोड़ के बजट की मांग नंदा राजजात समिति ने उत्तराखंड की धामी सरकार के समक्ष कुछ प्रमुख मांगें भी रखी हैं। समिति का कहना है कि जिस प्रकार कुंभ मेले के लिए एक समर्पित प्राधिकरण (Authority) होता है, उसी प्रकार राजजात के लिए भी स्थाई प्राधिकरण बनाया जाए। साथ ही, यात्रा मार्ग के बुनियादी ढांचे, सुरक्षा और सुविधाओं के विकास के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष बजट की मांग की गई है ताकि इसे वैश्विक स्तर पर सुरक्षित बनाया जा सके।