सुशासन का उत्तराखंड मॉडल: जब सरकार खुद पहुंची जनता की चौखट पर!
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड ‘सुशासन’ की नई परिभाषा लिख रहा है। “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम के माध्यम से राज्य सरकार ने यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है। 12 जनवरी 2026 की रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने का दौर खत्म हो रहा है और समाधान खुद लोगों के घर तक पहुँच रहा है।
आंकड़ों में सफलता की कहानी प्रदेश के 13 जनपदों में आयोजित 312 कैम्पों ने सेवा का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 2.36 लाख से अधिक पंजीकरण और 17,605 शिकायतों का त्वरित निस्तारण प्रशासनिक संवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। 35 हजार से अधिक प्रमाण पत्र और 1.31 लाख लोगों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना, समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के सशक्तिकरण की गूँज है।
मुख्यमंत्री का संकल्प मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट संदेश है—”हमारा लक्ष्य केवल योजना बनाना नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक उसका लाभ पहुँचाना है।” यह पारदर्शिता और समयबद्ध कार्यवाही उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य बनाने की ओर अग्रसर है।