
देहरादून में खराब मौसम के बीच प्रशासन की यह “देर आए दुरुस्त आए” वाली कार्यशैली वाकई अभिभावकों और बच्चों के लिए भारी असुविधा का कारण बनी है। जब तकनीक और पूर्वानुमान इतने सटीक हैं, तो रात 11 बजे का इंतज़ार करना केवल अव्यवस्था को जन्म देता है।
- पूर्वानुमान की अनदेखी: जब IMD और नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल कई दिनों से चेतावनी दे रहे थे, तो प्रशासन ने अंतिम समय तक निर्णय को क्यों टाला?
- रात 11 बजे का आदेश: यह समय किसी भी आधिकारिक सूचना के लिए अत्यंत अनुचित है। अधिकांश अभिभावक और स्कूली स्टाफ अगले दिन की तैयारी कर सो चुके होते हैं।
- ग्राउंड जीरो पर भ्रम: सुबह कई बच्चे स्कूल पहुँच गए, जिससे न केवल उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ बल्कि संसाधनों की भी बर्बादी हुई।
- जवाबदेही का अभाव: क्या प्रशासन वाकई किसी हादसे के बाद ही जागने की आदत डाल चुका है? यह एक गंभीर प्रश्न है।