टिहरी गढ़वाल: देवभूमि उत्तराखंड का हर कोना अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, लेकिन कई जगहें अपनी खतरनाक भौगोलिक स्थितियों की वजह से भी चर्चा में रहती हैं। ऐसी ही जगह है तोताघाटी, जो दशकों से अपने तीखे मोड़ों, संकरी सड़कों और गहरी खाइयों के कारण यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण मानी जाती रही है। अब इस घाटी में एक और बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
सैकड़ों मीटर गहरी दरारें, खतरे का संकेत
हाल ही में विशेषज्ञों ने बताया है कि तोताघाटी के पहाड़ों में सैकड़ों मीटर गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। भूवैज्ञानिकों का मानना है कि यदि ये दरारें और चौड़ी होती गईं, तो पूरा पहाड़ खिसक सकता है। इसका असर सिर्फ सड़कों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और गढ़वाल क्षेत्र के बड़े हिस्से तक पहुँचने का रास्ता भी बंद हो सकता है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी
वरिष्ठ भूविज्ञानी प्रो. महेंद्र प्रताप सिंह बिष्ट, जो लंबे समय से उत्तराखंड की पहाड़ियों का अध्ययन कर रहे हैं, ने स्पष्ट चेतावनी दी है –
“तोताघाटी की चट्टानें चूना पत्थर से बनी हैं। इनमें समय के साथ प्राकृतिक रूप से बड़ी दरारें और क्लिंट (गहरी दरारें) बनती रहती हैं। इन दरारों की चौड़ाई ढाई से तीन फीट तक पहुंच गई है और इनकी गहराई 80 मीटर से ज्यादा है। यह स्थिति किसी भी दिन बड़ी आपदा को जन्म दे सकती है।”
उन्होंने बताया कि उनकी टीम लगातार इस क्षेत्र की निगरानी कर रही है और संबंधित विभागों को अलर्ट कर चुकी है।
चारधाम यात्रा और सेना पर भी असर
यह क्षेत्र केवल आम यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि चारधाम तीर्थयात्रियों, स्थानीय अर्थव्यवस्था और सेना के परिवहन मार्ग के लिए भी बेहद अहम है। यदि पहाड़ का हिस्सा दरक कर नीचे आ गया, तो न केवल यात्राएं प्रभावित होंगी, बल्कि आपात स्थिति में सेना की आवाजाही भी रुक सकती है।
सिरोबगड़ का दर्द भी वही
प्रो. बिष्ट ने सिरोबगड़ के लगातार भूस्खलन पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि “सिरोबगड़” शब्द दो गढ़वाली शब्दों सेरा (धान की खेती वाली जगह) और बगड़ (बहने वाला स्थान) से मिलकर बना है। इसका मतलब ही है कि यह जगह प्राकृतिक रूप से पानी और मिट्टी के बहाव के लिए जानी जाती है। यही कारण है कि बारिश के मौसम में यहाँ सड़क बार-बार ढह जाती है।
स्थानीय लोगों की चिंता
तोताघाटी से गुजरने वाले स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि हर सफर अब डर के साए में कटता है। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने अपनी आँखों से पहाड़ पर बड़ी-बड़ी दरारें देखी हैं, जिनमें पत्थर डालने पर भी तली नजर नहीं आती। लोगों का कहना है कि अगर सरकार और विभाग समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह इलाका आने वाले दिनों में बड़ी त्रासदी का गवाह बन सकता है।