उत्तराखंड में मानसून का कहर लगातार जारी है। आज शुक्रवार, 29 अगस्त 2025 को भी मौसम विभाग ने राज्य के चार जिलों – देहरादून, नैनीताल, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में आज दिनभर भारी से अति भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं, अन्य पर्वतीय जिलों – रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और पौड़ी में भी कहीं-कहीं भारी बारिश और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है।
देहरादून में सुबह से झमाझम बारिश
राजधानी देहरादून में शुक्रवार सुबह से ही बारिश का दौर शुरू हो गया। लगातार हो रही झमाझम बारिश से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। मौसम विभाग का कहना है कि आज पूरे दिन बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। बीते दिन भी सुबह तेज बारिश हुई थी, जिसके बाद कुछ समय के लिए धूप निकली, लेकिन दोपहर होते-होते फिर से आसमान में काले बादल छा गए और कई जगहों पर मूसलाधार बारिश देखने को मिली।
नैनीताल और बागेश्वर में अलर्ट
नैनीताल और बागेश्वर जिले में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। यहां रहने वाले लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने पर्वतीय मार्गों पर अनावश्यक यात्रा न करने की अपील की है। लगातार बारिश से भूस्खलन और सड़कों के अवरुद्ध होने का खतरा बढ़ गया है।
थराली में भूस्खलन जारी, लोग दहशत में
चमोली जिले के थराली क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा अभी भी टला नहीं है। गुरुवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थराली के पीछे की सड़क टूट गई और उसका मलबा सीधे अस्पताल परिसर में जा गिरा। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ी हानि नहीं हुई, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीज और स्थानीय लोग दहशत में हैं। लोग पूरी रात जागकर गुजारने को मजबूर हुए। बारिश और भूस्खलन से कई ग्रामीण मार्ग बाधित हैं, जिससे लोगों की आवाजाही और मुश्किल हो गई है।
प्रशासन अलर्ट पर
मौसम विभाग ने साफ किया है कि आने वाले 24 घंटे राज्य के कई हिस्सों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव दलों को अलर्ट पर रखा है। खासतौर पर संवेदनशील क्षेत्रों में टीमों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
लोगों से अपील
- नदी-नालों के किनारे जाने से बचें
- पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करते समय सावधानी बरतें
- मौसम विभाग के ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखें
उत्तराखंड में मानसून का यह दौर फिलहाल और कठिनाई बढ़ा सकता है। ऐसे में सतर्कता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।