चंडीगढ़ नगर निगम के आगामी मेयर चुनाव को लेकर सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने में अब केवल 72 घंटे का समय शेष है, लेकिन विडंबना यह है कि शहर के तीनों प्रमुख दलों—भाजपा, आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस—में से किसी ने भी अभी तक अपने पत्तों का खुलासा नहीं किया है। समय की कमी और जीत के भारी दबाव के बीच शहर की राजनीति में ‘मंथन और बैठकों’ का दौर तेज हो गया है।
भाजपा: 2026 के भविष्य पर टिकी नजरें
भारतीय जनता पार्टी इस बार सबसे अधिक फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी की प्राथमिकता केवल मेयर की कुर्सी नहीं, बल्कि 2026 के नगर निगम चुनाव भी हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी ऐसे चेहरे की तलाश में है जो गुटबाजी से दूर हो और जिसका कोई विवादित बैकग्राउंड न हो।
- संभावित नाम: चर्चाओं के बाजार में सौरभ जोशी, महेश इंदर सिंह सिद्धू और कंवर राणा का नाम सबसे ऊपर है। हालांकि, अनुभव को प्राथमिकता मिलने पर पूर्व मेयर अनूप गुप्ता की भी वापसी हो सकती है।
- दिल्ली की अहमियत: प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद ही अंतिम नाम पर मुहर लगाएंगे।
आम आदमी पार्टी: अनुभव बनाम वफादारी
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर भी स्थिति पहेली बनी हुई है। पार्टी आलाकमान इस बार किसी भी तरह की ‘अंतर्कलह’ या ‘क्रॉस वोटिंग’ को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। इसके लिए पार्षदों के पिछले एक साल के काम का गोपनीय फीडबैक लिया जा रहा है।
- दावेदार: प्रशासनिक अनुभव के धनी हरदीप सिंह और पुराने कैडर के मजबूत सिपाही योगेश ढींगरा रेस में सबसे आगे चल रहे हैं।
कांग्रेस और AAP: क्या फिर बनेगा ‘गठबंधन’ का समीकरण?
चंडीगढ़ की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी चर्चा कांग्रेस और ‘आप’ के बीच गठबंधन को लेकर है। सूत्रों का दावा है कि पिछली बार के फॉर्मूले पर ही सहमति बन सकती है, जिसमें मेयर पद AAP को और सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के पद कांग्रेस को मिल सकते हैं।
- अहम बैठकें: 19 जनवरी को सांसद मनीष तिवारी का चंडीगढ़ दौरा और 20 जनवरी को कांग्रेस पार्षदों की बैठक इस गठबंधन की आधिकारिक घोषणा की दिशा में निर्णायक साबित होगी। हालांकि, अध्यक्ष एच.एस. लक्की अभी भी ‘बैठक के बाद फैसला’ की बात कह रहे हैं।
निष्कर्ष
नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आते ही चंडीगढ़ की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक अटकलों का दौर जारी है। क्या भाजपा अपने संगठनात्मक कौशल से बाजी मारेगी या विपक्षी एकता सत्ता के समीकरण बदल देगी? इसका फैसला अगले दो दिनों में साफ हो जाएगा।