मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने शनिवार को ऋषिकेश शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान करीब 11 बहुमंजिला इमारतों को सील कर दिया गया। एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने साफ कहा कि “नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे अनधिकृत निर्माण किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।” उन्होंने चेतावनी दी कि बिना मानचित्र स्वीकृति के अवैध निर्माण करने वालों पर इसी तरह सख्त कदम उठाए जाएंगे।
पुलिस बल की मौजूदगी में सीलिंग
यह कार्रवाई एमडीडीए सचिव द्वारा गठित विशेष टीम और संयुक्त सचिव के नेतृत्व में की गई। पुलिस बल भी मौके पर मौजूद रहा ताकि किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। बताया गया कि जिन इमारतों को सील किया गया है, उनमें से अधिकांश को पहले ही नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन तय समय सीमा में निर्माणकर्ताओं ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
किन-किन इमारतों पर गिरी गाज?
एमडीडीए की टीम ने जिन 11 प्रमुख निर्माणों को सील किया, उनमें शामिल हैं –
- निर्मल बाग गली नंबर 11 – मनीष अग्रवाल की 30×70 फीट पर बनी इमारत
- गली नंबर 11 – रघुन शर्मा का 30×50 फीट में अवैध निर्माण
- वीरभद्र रोड – प्रदीप दुबे की अवैध बिल्डिंग
- निर्मल बाग गली नंबर 10 – रवि का तीन मंजिला निर्माण
- निर्मल बाग गली नंबर 11 – विपिन चौधरी का स्कूल और कॉलोनी निर्माण
- हरिद्वार रोड, कोयल ग्रांट – स्वामी दयानंद महाराज का निर्माण
- रेड फोर्ट रोड – सुरेंद्र सिंह बिष्ट का तृतीय तल निर्माण
- गली नंबर 4, होटल गंगा अशोक के पास – अनीता पुजारा का कॉलोनी निर्माण
- निर्मल ब्लॉक बी गली नंबर 11 – अनुज का कॉलम निर्माण
- निर्मल बाग गली नंबर 11 – सागर का 20×50 फीट का अवैध निर्माण
इन सभी निर्माणों को उत्तराखंड नगर एवं ग्राम नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 का उल्लंघन माना गया।
आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। नियम तोड़कर बनाई गई किसी भी इमारत को बख्शा नहीं जाएगा। “मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रदेश में अवैध निर्माण को हर हाल में रोका जाए। जो लोग अनुमति के बिना बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर रहे हैं, उन्हें अब सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।”
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताया और कहा कि इससे शहर की खूबसूरती और व्यवस्था बनी रहेगी। वहीं, कुछ मकान मालिकों ने इसे कठोर बताया और कहा कि सरकार को वैकल्पिक समाधान भी देना चाहिए था। धामी सरकार के आदेश पर हुई इस सख्त कार्रवाई ने एक बात साफ कर दी है कि उत्तराखंड में अब अवैध निर्माण की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी। ऋषिकेश से शुरू हुई यह मुहिम आगे भी मसूरी और देहरादून क्षेत्र में जारी रहने वाली है।