पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने रचा इतिहास, दुनिया के टॉप 11 फॉरेंसिक वैज्ञानिकों में मिली जगह

चंडीगढ़: पंजाब विश्वविद्यालय (पीयू) के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के पूर्व चेयरपर्सन और प्रख्यात फॉरेंसिक वैज्ञानिक डॉ. केवल कृष्णन ने एक बार फिर देश और विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी प्रतिष्ठित रैंकिंग में उन्हें फॉरेंसिक साइंस रिसर्च के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष 11 वैज्ञानिकों में स्थान प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के साथ वह भारत के सबसे उच्च रैंक वाले फॉरेंसिक वैज्ञानिक बन गए हैं। यह प्रतिष्ठित रैंकिंग स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा जारी वर्ष 2025 की वैश्विक वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में दुनिया भर के 15,009 फॉरेंसिक वैज्ञानिकों के शोध कार्यों, प्रभाव और अकादमिक योगदान का मूल्यांकन किया गया। इस सूची में डॉ. केवल कृष्णन को “लीगल एंड फॉरेंसिक मेडिसिन” श्रेणी में 11वां स्थान प्राप्त हुआ है, जो भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

रैंकिंग तय करने के लिए वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर्स, उनके शोध कार्यों को मिले उद्धरण (Citations), स्कोपस एच-इंडेक्स और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके अकादमिक प्रभाव जैसे विभिन्न मानकों को आधार बनाया गया। इन सभी मानकों पर डॉ. कृष्णन का प्रदर्शन बेहद उत्कृष्ट रहा, जिसके चलते उन्हें यह सम्मानजनक स्थान हासिल हुआ। डॉ. केवल कृष्णन ने फॉरेंसिक साइंस के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय शोध कार्य किया है। उनके शोध विषयों में फिंगरप्रिंट विश्लेषण, फेस रिकंस्ट्रक्शन, फुटप्रिंट पहचान, ईयरप्रिंट अध्ययन, हस्ताक्षर सत्यापन और फॉरेंसिक विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग जैसे आधुनिक और महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। उनके शोध कार्यों ने अपराध जांच और वैज्ञानिक साक्ष्य विश्लेषण के क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोले हैं।

अब तक डॉ. कृष्णन 422 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं। उनके शोध कार्यों को वैश्विक स्तर पर 1.5 लाख से अधिक बार उद्धृत किया जा चुका है, जो उनके शोध की गुणवत्ता और प्रभाव को दर्शाता है। उनकी रिसर्च दुनिया की प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं ‘नेचर’ और ‘द लैंसेट’ जैसी अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स में भी प्रकाशित हो चुकी है, जो किसी भी वैज्ञानिक के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. केवल कृष्णन ने इसका श्रेय पंजाब विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर प्रोफेसर रेनु विग और विश्वविद्यालय के शोध-अनुकूल वातावरण को दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे युवा वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है।

उन्होंने युवा शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि यदि समर्पण और निरंतर मेहनत के साथ शोध कार्य किया जाए तो वैश्विक स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। उन्होंने छात्रों से विश्वविद्यालय में उपलब्ध शोध संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। डॉ. केवल कृष्णन की यह उपलब्धि न केवल पंजाब विश्वविद्यालय बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी सफलता भारतीय वैज्ञानिकों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान और उत्कृष्ट शोध क्षमता का प्रमाण भी मानी जा रही है।

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